आगरालीक्स …गुर्दे की पथरी कब निकल गई, मरीज को पता भी नहीं चलेगा, आगरा में अत्याधुनिक फ्लेक्सबल मिनी लेप्रोस्कोप से गुर्दे की पथरी निकालने का ट्रायल चल रहा है। इस नई तकनीक के बारे में 28 मार्च को लंदन में यूरोपियन एसोसिएशन ऑफ यूरोलॉजी की कांफ्रेंस में यूरोलॉजिकल एसोसिएशन ऑफ एशिया का प्रतिनिधित्व करते हुए आगरा के वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट प्रो मधुसूदन अग्रवाल ने जानकारी दी।
अभी तक गुर्दे की पथरी को निकालने के लिए तीन से चार मिटीमीटर और आकार बढा होने पर एक सेंटीमीटर का भी छेद किया जाता था। यह छेद भी तीन किए जाते हैं, इसके बाद लेप्रोस्कोप से गुर्दे के पथरी को निकाला जाता है। मगर, फ्लेक्सबल मिनी लेप्रोस्कोप लेजर तकनीक पर काम करता है। इससे एक छेद से ही पथरी को निकाला जा सकता है। इसके लिए भी दो मिलीमीटर का एक ही छेद किया जाता है। इसके रिजल्ट अच्छे आ रहे हैं, फ्लेक्सबल मिनी लेप्रोस्कोप से गुर्दे की पथरी निकालने का ट्रायल इंडिया में आगरा के साथ ही अमेरिका और जर्मनी में चल रहा है। इस कांफ्रेंस में शामिल होने के लिए प्रो. मधु सूदन अग्रवाल को एशिया के 25 देशों के डॉक्टरों में से चुना गया था।
10 सेंटीमीटर की पथरी देखकर डॉक्टर हैरान
कांफ्रेंस में प्रो. मधुसूदन अग्रवाल ने कॉम्प्लीकेटेड गुर्दे की पथरी के आॅपरेशन पर व्याख्यान दिया। इसमें उन्होंने 10 सेंटीमीटर (गुर्दे के बराबर की पथरी) का आकार के गुर्दे की पथरी के ऑपरेशन का वीडियो भी दिखाया, जो उन्होंने खुद किया था, पथरी के इतने बडे आकार को देखकर अमेरिका, यूरोप सहित एशिया के अन्य देशों के डॉक्टर हैरान रह गए।
डीहाइड्रेशन के कारण उत्तर भारत में बढ रहे पथरी के केस
प्रो. मधुसूदन अग्रवाल ने बताया कि दुनिया में पथरी के केस का 60 एशिया भारत में है। इसमें भी भारत में उत्तर भारत में गुर्दे की पथरी के केस ज्यादा देखने को मिल रहा हैं, यहां गर्मी अधिक रहती है, इससे डीहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी होना) होने से पथरी की समस्या बढ रही है। इसके साथ ही भूगर्भ जल में हैवी मेटल्स हैं, तंबाकू और गुटाखा व मिल्क प्रोडक्ट
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