आगरालीक्स… बसपा से नसीमुद्दीन सिद्दीकी को हटाए जाने के बाद आगरा की राजनीति गर्म हो गई है, चुनाव से चार महीने पहले सिद्दीकी ने यहां भी प्रत्याशी बदला था। उन पर प्रत्याशी के चयन में पैसे लेने के आरोप लगे हैं, इसे आगरा में बदले गए प्रत्याशी से भी जोडकर देखा जा रहा है लेकिन कोई खुलकर नहीं बोल रहा है।
बुधवार को बीएसपी महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बेनामी संपत्ति बना ली है. साथ ही इनके कई अवैध बूचड़खाने भी चल रहे हैं, जिसके चलते पार्टी की छवि खराब हो रही थी. सतीश चंद्र ने नसीमुद्दीन पर पार्टी के नाम पर अवैध वसूली का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने विधानसभा चुनाव में योग्य प्रत्याशियों को टिकट देने के बजाय ज्यादा पैसे देने वाले उम्मीदवारों को टिकट दिए, जिसका पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ा. इसके साथ ही नसीमुद्दीन सिद्दीकी और उनके बेटे अफजल सिद्दीकी को पार्टी के सभी पदों से बर्खास्त करने के साथ बाहर कर दिया गया है.
चुनाव से चार महीने पहले बरकत को हटाकर भुटटो प्रत्याशी
आगरा दक्षिण सीट से बसपा प्रत्याशी बरकत अली को चुनाव से चार महीने पहले हटा दिया गया था, इसके लिए पहले बसपा से निष्कासित जुल्लिफकार अहमद भुटटो की पार्टी में वापसी कराई, इसके बाद उन्हें आगरा दक्षिण से बसपा प्रत्याशी बना दिया गया। इसका विरोध भी हुआ था। बरकत को क्यों हटाया गया, इसे लेकर चर्चाएं होती रही थी, इसे भी पैसे लेकर टिकट देने से जोडकर देखा जा रहा है।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी का मायावती पर पलटवार
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने प्रेसनोट जारी करते हुए कहा है कि जो आरोप मेरे ऊपर लगाये गए हैं, वो सभी आरोप मैं सबूत के साथ मायावती एंड कंपनी के खिलाफ साबित कर दूंगा.’
अपनी बेटे के इंतकाल में भी नहीं गया
मायावती के प्रति अपनी वफादारी साबित करने के नसीमुद्दीन ने एक उदाहरण दिया. सिद्दीकी ने लिखा, ‘1996 में यूपी विधानसभा के चुनाव थे. मायावती जी बदायूं की बिल्सी सीट से चुनाव लड़ रही थीं. मैं चुनाव प्रभारी था. चुनाव के दौरान मेरी इकलौती बड़ी बेटी गंभीर रूप से बीमार हो गई. वो बांदा में थी. मेरी पत्नी का रो-रो कर बुरा हाल था. उसने फोन पर बताया कि बेटी की आखिरी सांस चल रही है, आप आ जाओ. मैंने मायावती जी को ये बताया. उन्होंने चुनाव खराब होने का हवाला देते हुए मुझे जाने से रोक दिया. मैं नहीं गया. मेरी इकलौती बेटी का इलाज के अभाव में इंतकाल हो गया. मैं अपनी बेटी के अंतिम संस्कार में भी नहीं गया और मायावती जी का चुनाव लड़ाता रहा. मैं अपनी बेटी की सूरत तक नहीं देख सका.’
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