आगरालीक्स.. नवरात्र पर आज मां चंद्रघंटा की पूजा अर्चना की जा रही है, मां चंद्रघंटा की पूजा करने से जागृत होता है मणिपुर चक्र ।
दुर्गा के स्वरूप चंद्रघंटा यानि चन्दुसूर कहलाती हैं। चन्दुसूर औषधि मोटापा दूर करने में सहायक होती है। मां की आराधना, आस्था के साथ सेहत का ध्यान रखा जाना आवश्यक है। मां दुर्गा के नौ रूपों में नौ औषधियों का भी वास होता है। आगरालीक्स में पढ़िये आज दुर्गा औषधि कवच, योग दर्शन, माता रानी का भोग।
माता रानी चंद्रघंटा
नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजन-आऱाधना की जाती है। यह शक्ति माता का शिवदूती स्वरूप है। इनके मस्तक पर घंटे का आकार का अर्धचंद्र है इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। असुरों के साथ युद्ध में देवी चंद्रघंटा ने घंटे की टंकार से ही असुरों का नाश कर दिया था।
औषधि कवच
नवदुर्गा के तीसरे दिन मां दुर्गा के स्वरूप चंद्रघंटा यानि चन्दुसूर। चन्दुसूर औषधि मोटापे की समस्या को दूर करती है। मोटापे की समस्या से परेशान लोग चंद्रुसूर को माता रानी को चढ़ाएँ। धनीये जैसी यह औषधि मोटापे को कम करने के साथ शक्ति को बढ़ाती है। हृदयरोग मे भी चंद्रिका औषधि काम करती है। इस पौधे की सब्जी भी बनाई जाती है। मां के प्रसाद के रूप में इसे ग्रहण करना चाहिये।
योगदर्शन
माता चंद्रघंटा के पूजन से साधक का मणिपुर चक्र के जागृत होने वाली सिद्धियां स्वतः प्राप्त हो जाती हैं। साधक को सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।
माता रानी का भोग- मां को दूध से बनी चीजें, गुड़, लाल सेब के साथ तीन केले चढ़ाए जा सकते हैं। माता रानी को दूध चढ़ाने और इसका दान करने से सभी प्रकार के दुखों से मुक्ति मिलती है। माता को घी का भोग लगाने और पूजन से बुध ग्रह की शांति होती है।