
हिंदू राष्ट्र की मांग ठुकराई
संविधान सभा ने नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाए जाने की मांग को ठुकरा दिया। कई हिंदू संगठन नए संविधान का विरोध कर रहे हैं। दक्षिणी इलाके में रहने वाले थारू और मधेसी (नेपाल में बसे हुए मूल रूप से भारतीय) नए संविधान के तहत नेपाल को सात प्रांतों में विभाजित करने के प्रावधान का विरोध कर रहे हैं। हालांकि, अभी प्रांतों के नाम और क्षेत्र निर्धारित नहीं किए गए हैं। दक्षिणी इलाकों के जातीय अल्पसंख्यकों का कहना है कि नए संविधान के तहत वे राजनीतिक रूप से पिछड़ जाएंगे। उनके मुताबिक, नए संविधान में उनके अधिकारों को दरकिनार किया गया है।
नया संविधान
– संविधान सभा द्वारा तैयार किया गया यह नेपाल का पहला संविधान है।
– नए संविधान के तहत दो सदनीय संसद का प्रावधान किया गया है।
– आरक्षण और कोटा सिस्टम के जरिए वंचित, क्षेत्रीय और जातीय समुदायों के सशक्तिकरण की व्यवस्था।
– मूल निवासी, दलितों और महिलाओं के लिए स्थानीय प्रशासन, प्रांतीय और संघीय सरकार से लेकर हर स्तर पर आरक्षण का प्रावधान।
– नए संविधान में ‘थर्ड जेंडर’ को भी मान्यता दी गई है।
– सभी जातीय भाषाओं को मान्यता। वहीं, प्रांतीय सभाओं को अपनी आधिकारिक भाषा चुनने का अधिकार दिया गया है।
– नेपाली देश की राष्ट्रीय भाषा बनी रहेगी।
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