आगरालीक्स आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हर तीन दिन में सडक हादसे में एक की मौत हो रही है। कारण जानकर चौंक जाएंगे।
आगरा के केसी जैन ने यूपीडा (उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण) से आरटीआई के तहयूपीडा से आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हादसे और यहां गति सीमा उल्लंघन को रोकने के संबंध में जानकारी मांगी थी। इस पर यूपीडा ने बताया कि अगस्त 2017 से मार्च 2018 के बीच इस एक्सप्रेसवे पर 873 दुर्घटनाएं हुईं। इसमें 100 लोगों की मौत हुई। अप्रैल 2018 से दिसंबर 2018 के बीच इसी एक्सप्रेसवे पर 1113 सड़क हादसे हुए।
17 महीने में 191 मौत
इस तरह कुल 17 महीने में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 191 लोगों को असमय मौत का शिकार होना पड़ा। यूपीडा ने यह भी बताया कि 2018 में 145 सड़क दुर्घटनाएं पशुओं के कारण हुईं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि एक्सप्रेसवे के दोनों ओर जब रेलिंग और फेंसिंग है तो फिर पशु एक्सप्रेसवे पर कैसे आए। यदि रेलिंग या फेंसिंग टूटी है तो इसका कौन जिम्मेदार है।
गति सीमा उल्लंघन की कोई जानकारी नहीं
यूपीडा के पास गति सीमा उल्लंघन के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। अधिवक्ता केसी जैन का कहना है कि इस एक्सप्रेसवे पर हल्के वाहन की निर्धारित गति सीमा 100 किमी प्रति घंटा है, गति सीमा उल्लंघन को रोकने के लिए यूपीडा ने अभी तक स्पीड कैमरे नहीं लगाए हैं। इस संबंध में अधिवक्ता ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल को कुछ सुझाव भेजे हैं।
बढ रही कमाई
यूपीडा ने अवगत कराया है कि वर्ष 2018 में 96,33,739 वाहन विभिन्न टोल प्लाजा से गुजरे। वर्ष 2018 में 177 करोड़ से अधिक की राशि टैक्स के रूप में वसूली गई।
यह दिए गए सुझाव
. गति सीमा उल्लंघन के लिए चालान की प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
. पशुओं को एक्सप्रेसवे पर आने से रोकने के लिए रेलिंग और फेंसिंग दुरुस्त की जाएं।
. दुर्घटनाओं की जांच रिपोर्ट तैयार हो, ताकि उस आधार पर अपेक्षित कार्रवाई की जा सके।