
मामला यह है…….
१५ मार्च २०१४ से ३००० से अधिक कथित सत्याग्रही जवाहर बाग पर कब्जा जमाए है। हाई कोर्ट के आदेश पर प्रशासन पिछले दो माह से बाग खाली कराने की तैयारियों में लगा था। मथुरा स्थित जवाहरबाग सरकारी जमीन है। इस पर करीब 100 एकड़ का बाग है। खुद को सत्याग्रही बता रहे लोग साल 2014 में बरेली से भगाए गए थे जिसके बाद इन्हें मथुरा प्रशासन द्वारा जवाहर बाग की जगह दी गई थी। सत्याग्रही उद्यान विभाग की राजकीय संपत्ति जवाहर बाग में धरना प्रदर्शन के नाम पर अवैध कब्जा किए हैं। इसके कारण राजकीय संपत्ति को लाखों रुपये की क्षति पहुंची है। सत्याग्रहियों के खिलाफ बलबा, जानलेवा हमला, सरकारी संपत्ति कब्जाना , धमकी देना , कर्मचरियों से मारपीट आदि का 10 से अधिक मुकदमे थाना सदर बाजार और हाइवे मैं दर्ज हैं ।
मामले में विजय पाल तोमर की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट बाग को खाली कराने का आदेश दे चुका था। इस पर पहले भी जवाहर बाग को खाली करने के नोटिस दिए गए, लेकिन उन पर अमल नहीं हुआ। इस याचिका पर डीएम मथुरा ने हाईकोर्ट में दो अप्रैल को जवाहर बाग खाली करने का शपथ पत्र दाखिल किया था।
सत्याग्रहियों द्वारा उद्यान विभाग के कर्मचारियों के साथ मारपीट और हिंसा के कारण उद्यान विभाग के कर्मचारियों द्वारा अन्य कर्मचारी संगठनों के साथ धरना दिया गया था। इसके बाद सत्याग्रहियों ने सदर तहसील पर हमला कर कर्मचारी और अधिवक्ताओं से मारपीट की थी।
हरि राम शर्मा, आईजी, कानून व्यवस्था ने कहा ….
“मथुरा में जवाहर बाग में कब्जा खाली कराने के लिए गई पुलिस पर कब्जेदारों ने फायरिंग कर दी। गोली लगने से हमारे फरह थाने के एसओ संतोष कुमार की मृत्यु हो गई। एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी को भी गोली लगी है। इसके अलावा चार सिपाही भी घायल हुए हैं। इनमें दो को गोली लगी जबकि दो पथराव में घायल हुए हैं। मौके पर कमिश्नर, आईजी, डीआईजी सभी वरिष्ठ अफसर पहुंच गए हैं। पूरे जिले की फोर्स के अलावा तीन कंपनी अतिरिक्त फोर्स भी भेज दी गई है। पुलिस ने जवाहर बाग खाली करा लिया है। घटना पर पूरी नजर रखे हुए हैं। इस घटना के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”
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