आगरालीक्स…आगरा में हरियाली तीज पर झूमी महिलाएं. डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की महिला प्रकोष्ठ ने मनाया हरियाली तीज उत्सव. कुलपति, शिक्षिकाएं, महिला कर्मचारियों ने उत्सव का आनंद उठाया…
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के महिला प्रकोष्ठ द्वारा पारंपरिक और सांस्कृतिक उत्सव हरियाली तीज आज गुरुवार को अत्यंत हर्षोल्लास एवं गरिमामयी वातावरण में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नारी सशक्तिकरण, सांस्कृतिक समरसता और परंपराओं को जीवंत बनाना था। इस विशेष कार्यक्रम मेँ सभी शिक्षक महिलाएं, महिला कर्मचारी और दैनिक वेतन महिला कर्मचारी ने एक साथ एक ही मंच पर इस उत्सव का आनंद उठाया जो की बहुत ही सरहानीय पहल है. कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्वेता चौधरी एवं रजनी यादव ने अत्यंत सराहनीय ढंग से किया। प्रारंभ में कौस्तुभी सक्सेना द्वारा प्रस्तुत गणेश वंदना नृत्य ने कार्यक्रम को शुभारंभ का भाव प्रदान किया।
इसके पश्चात, नृत्य, गायन एवं कविता के विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। डॉ. सिंधुजा चौहान की गरिमामयी उपस्थिति और सक्रिय सहभागिता ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। उन्होंने नारी-शक्ति और संस्कृति के संरक्षण के संदेश को आत्मीयता से प्रकट किया। उनका सादा, प्रभावशाली संवाद और मुस्कान सभी सहभागियों को प्रेरणा देने वाला रहा। कार्यक्रम के विशेष आकर्षण में पारंपरिक झूले की सजावट, मेहंदी, डांडिया नृत्य, हरियाणवी लोकनृत्य, कविता पाठ तथा खेल प्रतियोगिताएँ शामिल रहीं। छात्राओं ने पूरे आयोजन में अपनी सक्रिय सहभागिता से ऊर्जा का संचार किया।

इस आयोजन का सफल संचालन महिला प्रकोष्ठ की समन्वयक प्रो. अर्चना सिंह के नेतृत्व में डॉ. नीलम यादव, डॉ. मोनिका अस्थाना, डॉ. ममता सारस्वत, डॉ. रत्ना पांडे, डॉ. रेखा शर्मा, डॉ. मीनाक्षी चौधरी, सुश्री पूजा सक्सेना, डॉ. प्रीति सिंह एवं डॉ. सिंधुजा चौहान द्वारा किया गया। इन सभी शिक्षिकाओं ने नारी सशक्तिकरण के संदेश को मंच पर प्रस्तुत कर विश्वविद्यालय के प्रति अपनी सशक्त निष्ठा को प्रकट किया। कार्यक्रम में लगभग 200 प्रतिभागियों ने भाग लिया और यह आयोजन एक प्रेरणादायी स्मृति बनकर सभी के हृदय में अंकित हो गया।

कुलपति प्रो. आशु रानी जी ने अपने संबोधन में कहा: "हरियाली तीज जैसे पर्व महिलाओं की सांस्कृतिक चेतना, संगठन शक्ति और रचनात्मक ऊर्जा का उत्सव हैं। हमारे विश्वविद्यालय में महिलाएँ हर क्षेत्र में अग्रणी हैं, और यह उत्सव इस सच्चाई को और बल देता है।"


