
स्नेहा शर्मा पत्नी राहुल निवासी अरसैना, को जनवरी 2015 में प्रसव पीड़ा होने पर वूमैन हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। यहां सीजेरियन से प्रसव होने के बाद छुट्टी कर दी गई और पांच दिन बाद टांके कटवाने के लिए हॉस्पिटल बुलाया गया, मगर उन्होंने मथुरा में ही टांके बीए पास ऋषि शाक्य से कटवा लिए। इसके बाद उनके इन्फेक्शन होने पर वूमैन हॉस्पिटल में परिजनों ने इलाज कराया। आरोप है कि डॉ. रजनी पचौरी ने पेट दर्द, उल्टी, दस्त का इलाज किया, परिजनों के कहने के बाद भी अल्ट्रासाउंड नहीं कराया। 21 जनवरी को तबीयत बिगड़ने पर स्नेहा को परिजन हॉस्पिटल लेकर आए, तो अल्ट्रासाउंड कराया गया। इसमें उनके इन्फेक्शन से पस पड़ गया था।
इस पर डॉ. रजनी पचौरी के बजाय डॉ. रोशन लाल से ऑपरेशन कराया। यही नहीं, स्नेहा को नकली दवा देने के आरोप भी लगाए गए। इस मामले की जांच कर रहे एसीएमओ डॉ. अजय कपूर, महिला चिकित्सालय की डॉ. विनीता सिंह और एसडीएम सदर ए दिनेश कुमार ने की टीम ने डॉ. रजनी पचौरी को इलाज में जिम्मेदारी न निभाने के लिए दोषी पाया है। इससे मरीज के परिजनों को हुए आघात के लिए कार्रवाई करने को यूपी मेडिकल काउंसिल के संदर्भित प्रकरण भेजने की संस्तुति की है।
इस मामले में डॉ. रजनी पचौरी का कहना है कि मरीज ने झोलाछाप से टांके कटवा लिए थे, इससे तबीयत बिगड़ गई। उनका सही इलाज किया गया, सभी आरोप निराधार हैं।

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