आगरालीक्स …जब चीजें मुश्किल होती हैं तो बेटियां हमारे सम्मान की रक्षा करती हैं, यह रियो ओलंपिक में बेटियों ने कुश्ती और उसके बाद बैडमिंटन में गोल्ड की उम्मीद जगाकर कर दिखाया है, साक्षी मलिक और पीवी सिंधु ने उन लोगों की आंखें खोलने का काम किया है, जो नहीं चाहते कि उनके घर बेटियाएं आएं।
साक्षी के पिता बस कंडक्टर, पैदा हुई तो पत्नी की नौकरी लग गई
रोहतक, हरियाणा निवासी सुखवीर मलिक दिल्ली में बस कंडक्टर हैं, उनका कहना है कि “जब साक्षी पैदा हुई तो मेरी पत्नी की जॉब लग गई. हमनें साक्षी को उसके दादा दादी के पास रहने भेज दिया. वह सात साल की होने तक अपने दादा दादी के पास रही. जब गांव के लोग मेरे पिता जी से मिलने आते थे तो पहलवान जी राम-राम कहते थे….तभी से उसने ठान लिया कि वो दादा की तरह पहलवान बनेगी. फिर हमने रोहतक के छोटू राम स्टेडियम में उसको ट्रेनिंग दिलाई.” “साक्षी ने बहुत मेहनत की थी. उसने दिन रात एक कर दिया था. साक्षी ने मुझसे कहा था ‘पापा मैं मेडल जरूर लाऊंगी’. रूस की पहलवान से हारने के बाद भी हमने आस नहीं छोड़ी थी क्योंकि साक्षी पहले भी ऐसा करती रही है. वो दूसरे खिलाड़ी को भांपने नहीं देती है कि वो कौन सा दांव लगाएगी और कौन सा नहीं.”
वो कहते हैं, “उसने यहां भी यही किया और आखिरी मिनट में अपनी पूरी जान लगा दी.”
वो कहते हैं कि जीत के बाद जब साक्षी से उनकी बात हुई तो उसने कहा- ‘पापा ये मेडल मैं आपको गिफ्ट करती हूं.’ साक्षी के पिता उसकी उपलब्धी की पीछे उसकी मां का बड़ा योगदान मानते हैं और कहते हैं कि वो तो दिल्ली में नौकरी करते रहे, लेकिन साक्षी के खाने पीने और उसकी ट्रेनिंग का ध्यान उसकी मां ने ही रखा.
अभी न हार मारने वाली पीवी सिंधु
हैदराबाद निवासी पूर्व वालीबाल खिलाड़ी दंपति पी.वी. रमण और पी. विजया की 21 वर्षीय बेटी पीवी सिंधु की जीत उसकी कभी न हार मारने वाली आदत से कदम चूमती है। 5 फुट 10 इंच लंबाई प्रतिद्वंद्वियों को शिकस्त देने में मदद करती है। बैडमिंटन के प्रशिक्षण के लिए शुरूआती दिनों में पीवी सिंधु 56 किलोमीटर दूर जाती थी। पीवी सिंधु ने 2001 के ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैंपियन बने पुलेला गोपीचंद से प्रभावित होकर बैडमिंटन को अपना करियर चुना और महज आठ साल की उम्र से बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया। सिंधु ने सबसे पहले सिकंदराबाद में इंडियन रेलवे सिग्नल इंजीनियरिंग और दूर संचार के बैडमिंटन कोर्ट में महबूब अली के मार्गदर्शन में बैडमिंटन की बुनियादी बातों को सीखा। इसके बाद वे पुलेला गोपीचंद के गोपीचंद बैडमिंटन अकादमी में शामिल हो गई।
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