
रविवार शाम करीब पांच बजे देखते ही देखते आसमां में धूल का गुबार छा गया। ताज के पार्श्व में यमुना में पानी न होने और रेत के ढेर होने से इसका प्रभाव कुछ अधिक ही रहा। धूल से पर्यटकों को परेशानी उठानी पड़ी। आंधी के चलते ताज में मेहमानखाने की तरफ पेड़ की एक मोटी डाल टूटकर वहां रखी दो बेंचों के ऊपर गिर गई। गनीमत रही कि उस समय वहां कोई सैलानी नहीं बैठा था। इसी तरफ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) द्वारा लगाई गई शू-रैक के ऊपर भी पेड़ की डाल टूटकर गिर गई। जिसमें कर्मचारी बाल-बाल बच गए। वहीं, चमेली फर्श पर मुख्य मकबरे से मेहमानखाने तक भीड़ पर नियंत्रण को लगाई गई रेलिंग भी हवा के दबाव के चलते गिर गई। चमेली फर्श पर जिन पत्थरों के सांचे में रेलिंग को लगाया गया है, वह भी रेलिंग के साथ उलट गए। बाद में एएसआइ और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवानों द्वारा रेलिंग को दुरुस्त किया गया।
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