
कान्सेप्ट फोटो
आगरा की कमला नगर स्थित एसबीआई ब्रांच से 2013 से 2014 के बीच करोडों का कार लोन लिया गया। एक दो किश्त जमा करने के बाद शेष लोन जमा नहीं किया जा रहा था। इस तरह के लोन का बकाया 2 60 करोड पहुंच गया। कार लोन की वसूली न होने पर अधिकारियों से पूछताछ की गई, उन्हें नोटिस दिया गया। इसके बाद कुछ अधिकारियों के तबादले भी हो गए। इसके बाद भी शेष लोन की राशि जमा न होने पर जांच कराई गई। जिस नाम पर कार लोन लिया गया था, वहां टीम पहुंची तो पता चला कि इस नाम का व्यक्ति ही नहीं रहता है। इससे बैंक अधिकारियों के होश उड गए। इस पूरे मामले की शिकायत बैंक के उच्च अधिकारियों से की गई।
साजिश के तहत लिया गया लोन
इस पूरे प्रकरण की एसबीआई नुनिहाई के मुख्य प्रबंधक जसपाल सिंह से जांच कराई गई, इसमें सामने आया कि कार लोन दिलवाने के लिए साजिश रची गई। लोन की प्रॉसिसिंग और स्वीक्रति में अनिमिताएं की गईं।
35 लोगों ने लिया लोन
कार लोन मामले की एक और जांच संजय प्लेस एसबीआई प्रशासनिक कार्यालय के विजय कुमार लहासे से कराई गई। इसमें सामने आया है कि जिन 35 लोगों को कार लोन दिया गया, इसमें से कई के दस्तावेज पफर्जी हैं, कई ने अपने उपयोग के लिए कार ली, लेकिन उसका इस्तेमाल व्यवसायिक कार्य में किया जा रहा है। इस मामले में एसबीआई के काउंसलर जिसके द्वारा लोन स्वीक्रत किए गए के खिलाफ थाना न्यू आगरा में मुकदमा दर्ज किया गया है।
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