
किनारी बाजार में 10 दिनों से सराफाओं की हड़ताल जारी है। सराफाओं ने मोदी टी बेची, सब्जी बेची और गुरुवार को किन्नरों ने सराफाओं को समर्थन दिया। किन्नर गुरु ने सराफाओं को आश्वासन दिया कि वे सभी सराफाओं के साथ हैं।
सराफा एसोसिएशन के सचिव देवेन्द्र गोयल ने बताया कि जब तक सराफाओं की मांगों को नहीं माना जाता है, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का सराफाओं की ओर कोई ध्यान नहीं है। सरकार द्वारा बढ़ाए गए एक परसेंट टैक्स से हमें कोई परेशानी नहीं है, परेशान कर रहा है, नया विभाग, जिससे सराफाओं पर नई कागजी कार्रवाई का बोझ बढ़ जाएगा।
ये है मांग
श्री सराफा कमेटी ने वित्तमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा है कि केंद्र सरकार आयात होने वाले सोने पर 10 फीसदी कस्टम ड्यूटी वसूल रही है। यह सोना रॉ मैटेरियल के रूप में प्रयोग होता है और इसका महज 50 फीसदी ही आभूषणों में उपयोग हो पाता है। अगर राजस्व ही बढ़ाना है तो कस्टम ड्यूटी 10 की जगह 11 प्रतिशत कर दें। इससे एक्साइज की अपेक्षा कहीं ज्यादा टैक्स मिल जाएगा।
सोने, हीरे के आभूषणों पर केंद्र सरकार दो बार एक्साइज ड्यूटी लगाने का प्रयास कर चुकी है, लेकिन दोनों ही बार व्यापारियों के कड़े विरोध के कारण कदम पीछे खींचने पड़े। साल 2005 में केंद्र सरकार ने दो प्रतिशत एक्साइज लगाया था, जबकि 2012 में एक फीसदी ड्यूटी लगाई गई। दोनों ही बार व्यापारियों ने अनिश्चितकालीन बंदी कर सरकार को रोल बैक के लिए मजबूर कर दिया। यह तीसरा मौका है, लेकिन व्यापारी एक्साइज ड्यूटी के खिलाफ लंबे आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। वित्त मंत्री सराफा कारोबारी की मांग को सुनने के लिए तैयार नहीं हैं, ऐसे में वे पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात के प्रयास में जुटे हुए हैं।
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