आगरालीक्स …आगरा में लेप्रोस्कोपिक सर्जन की कांफ्रेंस में आयोडीन की कमी और अधिकता पर चर्चा हुई। इसके चलते थायरॉयड की गांठ (नॉडयूल्स) के केस तेजी से बढे हैं। इसमें महिलाओं की संख्या ज्यादा है, इस तरह के केस में अब लेप्रोस्कोपिक विधि से ऑपरेशन कर इलाज किया जा रहा है। वह भी गले से नहीं बल्कि कान के पीछे, सीधे मुंह से या फिर ब्रेस्ट से होल कर गले तक पहुंचकर। यानि थॉयरॉयड ग्रंथि के बढ़ने (घेंघा) या उस पर अन्य ग्रंथिया बनने से ऑपरेशन कराने पर अब आपके गले की खूबसूरती बिगड़ेगी नहीं। युवाओं में यह तकनीकि वरदान बनकर उभर रही है। अनुमानित तौर पर भारत में लगभग 30 फीसदी लोग इस समस्या से पीड़ित हैं। शनिवार को तीन दिवसीय कम्बाइंड नेशनल लेप्रोस्कोपिक सर्जरी कांफ्रेंस (9th SELSICON 2016 & 9th IHSCON 2016) के दूसरे दिन होटल क्लार्क शिराज में लेप्रोस्कोपिक विधि से ऑपरेशन और सिंगल होल ऑपरेशन पर चर्चा की गई।
एंडोक्रॉनोलॉजिस्ट डॉ ज्ञान चंद, एसजीपीजीआई, लखनऊ ने बताया कि आयोडीन का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा है। शाकाहारी लोग, जिनमें आयोडीन की कमी है, उन्हें आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करना चाहिए। वहीं, सी फूड सहित सब्जी और फलों से आयोडीन मिल रहा है, उन्हें आयोडीन युक्त नमक के इस्तेमाल की जरूरत नहीं है। मगर, ऐसा नहीं हो रहा है, हर कोई आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल कर रहा है। इससे थायरॉयड की समस्या होने लगी है और थायरॉयड ग्लैंड में नॉडयूल्स गांठ हो रही हैं। इनका आकार बढने से नींद न आना, मोटापा, पीरियडस अनियंत्रित होना सहित अन्य समस्याएं हो रही हैं। यह महिलाओं में ज्यादा देखने को मिल रहा है। कई स्टडी में सामने आया है कि अल्ट्रासाउंड कराने पर 30 फीसद लोगों में थायरॉयड के नाडयूल्स मिल रहे हैं। इस तरह के केस में लेप्रोस्कोपिक विधि से ऑपरेशन किए जा रहे हैं। नाडयूल्स का आकार तीन से चार सेंटीमीटर है तो मुंह के रास्ते लेप्रोस्कोपिक विधि से बिना छेद के ऑपरेशन किए जा रहे हैं। आकार अधिक होने पर कान के पीछे, गर्दन और ऑक्सलरी ब्रेस्ट साइड से ऑपरेशन हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज झांसी के सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ राजीव सिन्हा ने बताया कि वन होल ऑपरेशन के रिजल्ट बहुत अच्छे हैं। मगर, इसका प्रशिक्षण बहुत कम चिकित्सकों को ही है।
बच सकते हैं हर्निया से
डॉ. राजीव सिन्हा ने बताया कि हर्निया से बचा जा सकता है, इसलिए खान पान अच्छा रखें, ऐसा काम ना करें, जिससे पेट पर ज्यादा असर पडे। जिन लोगों को ज्यादा खांसी रहती है और कब्ज की शिकायत होती है, उन्हें हर्निया होने की आशंका बढ जाती है।
एम्स के निदेशक डॉ. एमसी मिश्रा ने किया उद्गाटन
आगरा। कांफ्रेंस का उद्घाटन एम्स के निदेशक डॉ. एमसी मिश्रा (मुख्य अतिथि) ने दीप जलाकर किया। मंचासीन अतिथियों में विशिष्ट अतिथि डॉ. एसके मिश्रा, डॉ. जीएम मोइंगरथम, डॉ. आर पद्माकुमार, डॉ. पवानिंदर लाल, आयोजन अध्यक्ष डॉ. अपूर्व चतुर्वेदी, डॉ. एसएस असोपा व मुख्य रूप से आयोजन समिति के पैटर्न प्रो. बीडी शर्मा, प्रो. सीके गुप्ता, प्रो. एचएस असोपा, प्रो. एसडी मौर्या, को-चेयरमैन डॉ. एचएल राजपूत (प्रसीडेंट उप्र एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स) डॉ. ज्ञान प्रकाश, डॉ. सुनील शर्मा (मीडिया प्रभारी) डॉ. रवि गोयल, डॉ. सिद्धार्थ धर (संयुक्त सचिव), डॉ. भूपेन्द्र कुमार (कोषाध्यक्ष), डॉ. भूपेन्द्र सिंघानिया, साइंटिफिक सैकेट्री आदि उपस्थित थे। संचालन आयोजन सचिव डॉ. समीर कुमार व धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अमित श्रीवास्तव ने दिया।
47 डॉक्टरों को मिली एफसीएलएस व एमसीएलएस की डिग्री
आगरा। आयोजन सचिव डॉ. समीर कुमार व डॉ. अमित श्रीवास्तव ने बताया कि इंटरनेशनल कॉलेज ऑफ लैप्रोस्कोपिक सर्जन के कन्वोकेशन में 47 लोगों को एफसीएलएस (फैलो ऑफ द कॉलेज ऑफ लैप्रोस्कोपिक सर्जनशिप) व एमसीएलएस (मैम्बरशिप ऑफ कॉलेज ऑफ लैप्रोस्कोपिक सर्जनशिप) की डिग्री प्रदान की गई। एफसीएलएस की फैलोशिप पाने वालों में आगरा के डॉ. अंकुर बंसल भी शामिल थे।
सेल्सी में डॉ. राजीव सिन्हा व आईएचएस में डॉ. संदीप कुमार ने सम्भाला अध्यक्ष का पदभार
आगरा। (selsi) के वर्तमान अध्यक्ष डॉ. जीएस मोइंगरथन ने डॉ. राजीव सिन्हा को राष्ट्रीय अध्यक्ष का पदबार सौंपते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं। वहीं आईएसएस के वर्तमान अध्यक्ष डॉ. आर पद्माकुमार ने डॉ. संदीप कुमार को रा,ट्रीय अध्यक्ष का पदभार सौंपा।
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