आगरालीक्स… कहानी 1856 की घटना थी, गुलाम देश में कहानी लिखी गई और देश के आजाद होने के बाद शतरंज के खिलाडी बनी, फिल्म में कहानी को और आगे बढाया गया है।
इसमें दिखाया गया है कि अवध लुट रहा है और जागीरदार शतरंज खेल रहे है, सेना सामने से निकल रही है, शतरंज की जीत हार को लेकर वे एक दूसरे को गोली मार देते हैं। इसी तरह से प्रेमचंद की कहानी ईदगाह पर फिल्म बनती तो ट्रेन में जुनैद मॉब लिंचिंग का शिकार नहीं होता। प्रेमचंद की कहानी पर फिल्म बनें तो समाज को संदेश दिया जा सकता है, इसे लेकर सेंट पीटर्स कॉलेज में स्मरण प्रेमचंद के तहत शनिवार को सुल्युलाइड पर प्रेमचंद विषय पर चर्चा की गई।
प्रतिरोध का सिनेमा आंदोलन के संयोजक और समीक्षक संजय जोशी ने बच्चों को एनीमेटेड मूवी के माध्यम से समाज में हो रहे बदलाव और उनकी जिज्ञासाओं पर चर्चा की, बच्चों को टेल आॅफ चेयरी सहित अन्य मूवी दिखाई गईं। वहीं, शाम को शतरंज के खिलाडी फिल्म पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की कहानी और उपन्यास के अधिकांश पात्र समाज में हाशिए रहने वाला वर्ग, गरीब, महिला और किसान थे। इन वर्गों के जीवन स्तर में पिछले 100 साल में कोई खास अंतर नहीं आया है, इसलिए आज प्रेमचंद के साहित्य पर और अधिक अर्थपूर्ण फिल्मे बनाए जाने की जरूरत है।

संस्कृति कर्मी के क्षेत्र में सक्रिय एम गनी ने पीपुल्स सिनेमा की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि वह आम लोगों की भागीदारी से सिनेमा के निर्माण के लिए कार्य कर रहे हैं। पीपुल्स सिनेमा केवल मनोरंजन के लिए नहीं है बल्कि मनोरंजक तरीके अर्थपूर्ण सिनेमा को लोगों के बीच तक ले जाना है। आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो ब्रजेश चंद्रा, अरुण डंग, डॉ प्रियम अंकित, डॉ प्रेम शंकर, सुरेंद्र जोशी, अनिल शुक्ल, योगेंद्र दुबे, विनय शुक्ल, डॉ नसरीन बेगम, डॉ ज्योत्सना रघुवंशी, अनिल जैन, डॉ विजय शर्मा, डॉ भावना, डॉ सुरेंद्र जौहरी, डॉ रंजना मल्होत्रा, सुरेंद्र यादव, रवि प्रजापति आदि मौजूद रहे।
आज का कार्यक्रम
स्मरण प्रेमचंद के आगामी कार्यक्रम के बारे में अनिल शुक्ल ने बताया कि रविवार को तीन बजे से रामरघु शॉपिंग आर्केड, एमजी रोड में प्रतिरोध का सिनेमा आंदोलन पर दोपहर तीन बजे से चर्चा की जाएगी।