आगरालीक्स…यूं तो पूरा बृज राधारानी और बांसुरीवाले का है, लेकिन आपको मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना या कहीं और जाना हो तो पहले कहां जाएंगे. अकेले वृंदावन में हैं इतने मंदिर
पूरा बृज राधारानी और अपने बांसुरी वाले का है. देश ही नहीं दुनिया के कोने—कोने से यहां भक्त अपने आराध्य के दर्शन करने के लिए दौड़े चले आते हैं. लाखों की संख्या में हर रोज श्रद्धालु मथुरा, बरसाना, वृंदावन, गोवर्धन, गोकुल, रमणरेती, दाऊजी, नंदगांव जैसे पवित्र स्थानों पर दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं. वृंदावन के ठाकुरजी की तो महिमा ही अपरम्पार है. यहां श्रद्धालुओं की हजारों की संख्या पट खुलने से पहले ही अपने आराध्य के दर्शन को बेताब दिखाई देती है. पूरे दिन यही क्रम चलता है. उधर बरसाने की राधारानी के दर्शन को हजारों लोग 251 सीढ़ियां चढ़कर जाते हैं. कई लोग ऐसे हैं जिन्हें राधारानी के दर्शन करने मात्र से ही आत्मीय शांति मिल जाती है तो वहीं कई ऐसे श्रद्धालु भी हैं जिन्हें तो बस अपने बिहारी जी के दर्शन मिल जाएं और वो उसी में तृप्त हो जाते हैं. 7 कोसीय गोवर्धन की परिक्रमा देने के लिए हर रोज हजारों श्रद्धालु पैदल चलते हैं और गोवर्धन की परिक्रमा लगाकर अपने को धन्य समझते हैं. आगरा, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश से तो लाखों श्रद्धालु ऐसे हैं जो कि हर महीने गोवर्धन की परिक्रमा देने के लिए आते हैं.

एक अनुमान के मुताबिक वृंदावन में तकरीबन 5000 छोटे-बड़े मंदिर हैं. यहां के मंदिर राधा-कृष्ण के अमर प्रेम कहानी गाते हैं. कुछ मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराने हैं वर्ष 1515 में महाप्रभु चैतन्य ने यहां के कई मंदिरों की खोज की थी. यही नहीं वृंदावन में मंदिरों की संख्या लगातार बढ़ रही है. प्रेम मंदिर इसका एक उदाहरण है. यहां विश्व विख्यात बांके बिहारी मंदिर के अलावा सात संप्रदायों के करीब पांच हजार मंदिरों की श्रृंखला है. जो प्रभु कृष्ण की शरण में यहां आया, यहीं का होकर रह गया. सप्त देवालयों में दर्शन की इच्छा लेकर हर रोज हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं. इनमें बांके बिहारी, गोविंद देव, गोपीनाथ, मदन मोहर, राधारमण, राधा दामोदर और राधा वल्लभ मंदिर हैं. इन विख्यात मंदिरों के आलवा शहर की कुंज गलियों में घर घर श्रीगोपाल की ठाकुरजी के रूप में सेवा हो रही है.