आगरालीक्स… आगरा के कान्वेंट और मिशनरी स्कूलों में नर्सरी, यूकेजी के बच्चों को सवाल का जवाब रटाया जाता है, व्हाटस योर फादर
एंड मदर, माई फादर इज माई मदर इज हाउस वाइफ, यह कहने में नन्हें मुन्ने बच्चे सकुचा रहे हैं, टीचर का रेस्पोंस भी अच्छा नहीं होता है जब वे जवाब को रिपीट करते हैं, ओ योर मदर इज हाउस वाइफ।
कुछ चीजें बहुत तेजी से बदल रही हैं, इन्हें देखना है तो बाल मन को पढने की जरूरत है। चार से पांच साल के बच्चों को हाउस वाइफ के बारे में अध कचरा ज्ञान है, जब एक बच्चे से पूछा कि बेटा हाउस वाइफ किसे कहते हैं, उसका सीधा जवाब था, जो घर में रोटी बनाए, बर्तन साफ करे, यह उसे कितने समझाया, बच्चे का जवाब था स्कूल में टीचर ने लेकिन अपनी फ्रेंड का नाम लेते हुए, उसकी मम्मा हाउस वाइफ नहीं है।
हाउस वाइफ कहते समय झुक रही नजर
बाल मन को पढे तो स्कूल में पढाई से ज्यादा एक्टिविटीज हो रही हैं, अलग अलग तरह की एक्टिविटीज हैं जिसकी आप कल्पना नहीं कर सकते हैं, एक चार साल के बच्चे से मॉडल बनवाया जा रहा है, उससे कहा जा रहा है कि मुखौटे तैयार करें, खैर मुखौटे तैयार करना बच्चों के लिए संभव नहीं है लेकिन एक अलग के मुखौटे में बच्चे बंध गए हैं। आलम यह है कि बच्चों की अपनी मम्मा को हाउस वाइफ बताते समय नजरें झुक जाती हैं, टीचर का रेस्पोंस भी ऐसा होता है कि यह बच्चा कुछ नहीं कर पाएगा क्योंकि इसकी मां तो हाउस वाइफ है।
जिनकी मां हाउस वाइफ, वे बुलंदियों पर पहुंचे
ऐसे तमाम उदाहरण हैं और जब किसी पर्सनेलिटी का इंटरव्यू लिया जाता है, तो वह सवाल का जवाब देता है कि उसकी मां हाउस वाइफ थीं, इसलिए मुकाम हासिल कर सका। दरअसल, हाउस वाइफ का मतलब, उससे है जो पूरे घर को चलाती है, वह कई घंटे लगातार काम करती है लेकिन उस काम के लिए पारिश्रमिक नहीं मिलता है।