आगरालीक्स….पांच दिवसीय दीपोत्सव आज धनतेरस से शुरू. जानिए छोटी दीपावली, बड़ी दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाईदूज के शुभ मुहूर्त व पूजा विधि सहित पूरी जानकारी
पांच दिवसीय दीपोत्सव आज शुक्रवार को धनतेरस के साथ शुरू हो गया है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर, शुक्रवार को सुबह लगभग 10 बजकर 30 मिनट पर प्रारंभ हो गई है और 7 नवंबर, शनिवार को सुबह लगभग 10 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगी। ज्योतिषाचार्य हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की उदया तिथि के नियमानुसार त्रयोदशी 7 नवंबर को पड़ रही है, लेकिन धनतेरस का पर्व प्रदोष काल में मनाए जाने का विधान है। चूंकि 6 नवंबर को शाम के समय त्रयोदशी तिथि व्याप्त रहेगी, इसलिए शास्त्र सम्मत मत के अनुसार धनतेरस 6 नवंबर को ही मनाया जाना उचित होगा।
ज्योतिषाचार्य हृदय रंजन शर्मा जी का कहना है कि धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा प्रदोष काल में ही श्रेष्ठ मानी गई है।
क्या खरीदना होगा शुभ?
शास्त्रों के अनुसार इस दिन पीतल के बर्तन, सोना, चांदी, नए वस्त्र और विशेष रूप से झाड़ू व नमक खरीदना घर में सुख-समृद्धि और दरिद्रता के नाश का प्रतीक है। झाड़ू को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है।
6 नवंबर 2026 को धनतेरस के दिन राहुकाल –
सुबह 10:42 बजे से दोपहर 12:04 बजे तक रहेगा. यानी करीब 1 घंटे 22 मिनट तक राहुकाल का समय रहा.
खरीदारी के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त –
धनतेरस के दिन सोना-चांदी, बर्तन और अन्य नई चीजें खरीदने के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है. अगर आप भी इस दिन खरीदारी करने का प्लान बना रहे हैं, तो नई दिल्ली के अनुसार ये शुभ समय देख सकते हैं.
धनतेरस 2026 चौघड़िया मुहूर्त समय –
अमृत चौघड़िया सुबह 10:31 से 10:42 बजे तक
शुभ चौघड़िया दोपहर 12:04 से 1:26 बजे तक
चर चौघड़िया शाम 4:10 से 5:32 बजे तक
लाभ चौघड़िया रात 8:48 से 10:26 बजे तक
धनतेरस 2026 पूजा शुभ मुहूर्त –
धनतेरस पूजा मुहूर्त : शाम 6:02 बजे से 7:57 बजे तक
प्रदोष काल : शाम 5:32 बजे से रात 8:09 बजे तक
वृषभ काल (स्थिर लग्न) : शाम 6:02 बजे से 7:57 बजे तक
यम दीपदान का समय : शाम 5:32 बजे से 6:51 बजे तक
इस समय प्रदोष काल में स्थिर लग्न है, जो लक्ष्मी पूजन और निवेश के लिए सबसे उत्तम माना गया है।
इस दिन आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि, धन के अधिपति कुबेर और माता लक्ष्मी का पूजन करने से वर्ष भर आरोग्य, धन और सुख की प्राप्ति होती है।
07 नवंबर छोटी दीपावली (नरक चतुर्दशी)
माता धूमावती पूजा, काली चौदस –
हर साल दीपावली से एक दिन पहले छोटी दिवाली मनाई जाती है। छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी, नरक चौदस, रूप चतुर्दशी और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन यम देवता की पूजा और दीप दान का विधान है। इसके अलावा छोटी दिवाली के दिन यम देवता के अलावा माता धूमावती व माता काली की भी पूजा की जाती है।
नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। जिसका शुभ मुहूर्त 8 नवंबर 2026 की सुबह 05:41 से 11:26 तक रहेगा। इसमें उबटन लगाने और शरीर की स्वच्छता का विशेष महत्व है। अमावस्या तिथि 08 नवंबर, रविवार को सुबह 11:27 से प्रारंभ होगी। इसके बाद दीपावली का पर्व शुरू होगा।
वहीं नरक चतुर्दशी के दिन चंद्रोदय का समय शाम 5 बजकर 41 मिनट रहेगा। वहीं यम दीपदान के लिए गोधूलि और सायाह्न संध्या मुहूर्त उत्तम रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 5 बजकर 31 मिनट से शाम 5 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। सायाह्न संध्या मुहूर्त शाम 5 बजकर 31 मिनट से शाम 6 बजकर 50 मिनट तक रहेगा।
08 नवंबर हनुमान जी, श्री गणेश माता महालक्ष्मी पूजन विशेष –
इस दिन हनुमान जी की पूजा आप प्रातः काल से दोपहर 12:05 तक कभी भी कर सकते है।
सनातन परंपरा का सबसे बड़ा प्रकाश पर्व दीपावली 2026 में रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन कार्तिक मास की अमावस्या पर माता लक्ष्मी और विघ्नहर्ता श्री गणेश की पूजा से घर में सुख, समृद्धि और धन की वर्षा होती है। ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया कि अमावस्या 8 नवंबर को सुबह 11:28 AM से शुरू होकर 9 नवंबर दोपहर 12:32 PM तक रहेगी। दीपावली पूजन के लिए प्रदोष काल में अमावस्या का होना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
राहु काल : शाम 4:09 PM से 5:31 PM तक – इस दौरान कोई नया कार्य या पूजन प्रारंभ न करें।
पूजा का शुभ मुहूर्त –
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (मुख्य) – शाम 5:54 PM से 7:50 PM
फैक्ट्री, दुकान, कारोबार के लिए 3 सबसे शुभ लग्न –
वृषभ लग्न – स्थिर लग्न शाम 05:54 PM से 07:50 PM तक – सबसे उत्तम – सर्राफा, कपड़ा, परचून, बैंक, तिजोरी, बही-खाता पूजन। इसमें की गई पूजा से लक्ष्मी स्थिर होती है।
मिथुन लग्न – द्विस्वभाव – रात 07:50 PM से 10:05 PM तक – ऑनलाइन बिजनेस, ट्रेडिंग, कमीशन, दलाली, शेयर मार्केट वालों के लिए
सिंह लग्न – स्थिर लग्न – देर रात 12:30 AM से 02:45 AM तक (9 नवंबर) – फैक्ट्री, बड़ी मशीनरी, प्रॉपर्टी, सरकारी ठेकेदारों के लिए – रात में जगने वाले कारखाने
शाम की चौघड़िया (दुकान, शोरूम, ऑफिस, घर के लिए)
शुभ – शाम 05:31 PM से 07:09 PM – दुकान की मुख्य पूजा, गद्दी पूजन
अमृत – रात 07:09 PM से 08:47 PM – तिजोरी, कैश बॉक्स, बही-खाता पूजन
चर – रात 08:47 PM से 10:26 PM – घर पर करने के लिए सबसे शुभ रहेगा
सुबह 10:43 AM से 12:04 PM अमृत चौघड़िया में – पूरे प्लांट में सफाई, मशीनों पर तेल-सिंदूर, माला पहनाना, विश्वकर्मा जी की पूजा। शाम 05:54 PM से 07:50 PM वृषभ लग्न + शुभ चौघड़िया में – सिर्फ ऑफिस में बैठकर तिजोरी और बही-खाते की पूजा। फैक्ट्री बंद करके मालिक- मुनीम ही करें।
गोवर्धन पूजा – 10 नवंबर विशेष –
दिवाली के अगले दिन कई जगहों पर गोवर्धन पूजा मनाई जाती है, लेकिन इस बार तिथि की गणना के कारण यह पर्व 10 नवंबर को मनाया जाएगा. ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की पंचांग के अनुसार, गोवर्धन पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को की जाती है. पंचांग के अनुसार, साल 2026 में कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर शुरू होगी और 10 नवंबर को दोपहर 2 बजे समाप्त होगी. उदया तिथि के आधार पर गोवर्धन पूजा 10 नवंबर, मंगलवार को मनाई जाएगी.
गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त –
अभिजीत मुहूर्त – सुबह 11:44 से दोपहर 12:27 तक
गोधूलि मुहूर्त शाम 5:30 से 6:00 बजे तक रहेगा।
गोवर्धन पूजा का संबंध भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा हुआ है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्रदेव के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया था. उन्होंने सात दिनों तक पर्वत को धारण करके गोकुलवासियों और उनके पशुओं की रक्षा की थी. मान्यता है कि तभी से गोवर्धन पूजा की परंपरा शुरू हुई.
भाई दूज 11 नवंबर विशेष
दिवाली के बाद भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है. इसे यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है. ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है. साल 2026 में भाई दूज का त्योहार 11 नवंबर, बुधवार को मनाया जाएगा. इस दिन तिलक करने का दोपहर 1:10 से 03:20 मिनट तक रहेगा। इस समय बहन अपने भाई के माथे पर तिलक कर सकती है।