आगरालीक्स… यह एक दुनिया के अनलकी हाथी मोहन की 55 साल की दर्द भरी दास्तां हैं। इसे सुनकर आपकी आंखों में भी आंसू आ जाएंगे, लेकिन एक हाथी की जिंदगी के लिए लडी गई लडाई का अंजाम सुखद है।
मोहन की उम्र 55 साल है, उसे बचपन में ही पकड लिया गया था और लखनऊ के एक गांव में उसे बेडियों में जकडकर कमाई के लिए इस्तेमाल किया जाता था। मंदिर के सामने भीख मंगवाने से लेकर शादियों में ले जाते थे। उसे यातनाएं दी जाती थी और भूखा रखा जाता था। मोहन के बारे में 2014 में वाइल्ड लाइफ की टीम को पता चला। जुलाई 2014 में वाइल्ड लाइफ की टीम ने मोहन हाथी को स्वतंत्र कराने के लिए कानूनी लडाई शुरू की। सितंबर के पहले सप्ताह में मोहन को मुक्त कराने के आदेश हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने दिए। गुरुवार को वाइल्ड लाइफ एसओएस की टीम मोहन को एलीफेंट केयर सेंटर, चुरमुरा ले आई। सह संस्थापक कार्तिक सत्यनारायन और गीता शेषमणि का कहना है कि मोहन को एलीफेंट केयर सेंटर में रखा गया है और सभी सुविधाएं दी जाएंगी।
मुक्त कराने के 19 प्रयास हुए असफल, इसलिए बना अनलकी एलीफेंट
मोहन को दुनिया का अनलकी एलीफेंट कहा जाने लगा। जुलाई 2014 में मोहन को मुक्त कराने के प्रयास किए गए। मगर, 19 प्रयास असफल हो गए। इसके लिए जनआंदोलन चला, पुलिस और एनजीओ आगे आए। इसके बाद ही मोहन मुक्त हो सका।
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