आगरालीक्स… आगरा में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के टॉपर्स की खुशी का ठिकाना नहीं हैं, जाने कैसे मिली सफलता, वीडियो के लिए क्लिक करें
इंटरमीडिएट की टॉपर स्म्रति सिंह
इंटरमीडिएट में इंटर टॉप करने वाली स्म्रति सिंह ने बताया कि टाइम टेबिल बनाकर आठ घंटे पढ़ाई की। स्कूल भी मिस नहीं किया। लक्ष्य संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर आइएएस अधिकारी बनना है। पीएम नरेंद्र मोदी उनके रोल मॉडल हैं।
स्मृति कहती हैं कि वह नरेंद्र मोदी की तरह देश की सेवा करना चाहती हैं। मौका मिला तो सबसे पहले वह शिक्षा का स्तर सुधारने का प्रयास करेंगी। विज्ञान व गणित पसंदीदा विषय हैं। सफलता का श्रेय अपने परिवार और शिक्षकों को देती हैं। उनके पिता प्रवीन सिंह मेडिकल रिप्रेंजेटेटिव और माता सुनील सिंह गृहणी हैं। दादा उदयपाल सिंह व दादी मंजूलता हमेशा आगे बढ़ने को प्रेरित करते हैं। स्मृति का कहना है कि हर व्यक्ति में कुछ न कुछ खूबी होती है, बस जरूरत काबिलियत पहचानें और लक्ष्य निर्धारित कर मेहनत करने की होती है। साथ ही मोबाइल से दूरी बनाने की जरूरत है।
सौम्या सिंह दूसरे स्थान पर रहीं
शमसाबाद रोड स्थित गायत्री मधुसूदन सिटी पार्ट टू निवासी बीडी जैन कन्या इंटर कॉलेज की छात्र सौम्या सिंह ने इंटर में 86.4 फीसद अंक प्राप्त कर जिले में दूसरा स्थान पाया है। वह बताती हैं, कि वह चिकित्सक बनकर गरीबों की सेवा करना चाहती हैं। इसके लिए बोर्ड परीक्षा खत्म होते ही उन्होंने मेडिकल की तैयारी भी शुरू कर दी है। अपनी सफलता के पीछे वह रोजाना पांच से छह घंटे की गंभीर पढ़ाई व अभिभावकों और शिक्षकों के आशीर्वाद को राज मानती हैं। बोर्ड परीक्षा या अन्य परीक्षा की तैयारी करने वालों को वह दिखावे की जगह एकाग्र होकर पढ़ने की सलाह देती हैं। उन्होंने हाईस्कूल में भी 84.5 फीसद अंक प्राप्त किए थे। उनके पिता शारदा प्रसाद सिंह एपी इंटर कॉलेज शमसाबाद में गणित प्रवक्ता हैं, जबकि मां शशि सिंह गृहणी हैं। उनके दो छोटी बहन और एक छोटा भाई भी है।
हाईस्कूल के टॉपर ज्यास्व
हाईस्कूल में जिला टॉप करने वाले दामोदर इंटर कॉलेज, होलीपुरा, बाह के छात्र जयास्व कुमार के 92. 67 फीसद अंक आए हैं। वह बताते हैं कि उनका सपना आइएएस बनकर देश की सेवा करना है। इसके लिए वह अभी से मन लगाकर पढ़ते हैं। उनके पिता पवन कुमार दामोदर इंटर कॉलेज होलीपुरा में भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता हैं, जबकि मां माधुरी बाह के रघुनाथपुरा में परिषदीय विद्यालय में शिक्षक हैं। इस कारण घर में शुरुआत से ही पढ़ाई का माहौल रहा। आम दिनों में वह छह घंटे पढ़ाई करते थे, लेकिन परीक्षा के दौरान वह 10 घंटे तक पढ़े। जहां कोई दिक्कत आई, माता-पिता ने उनकी मदद की।