आगरालीक्स… आगरा में डॉक्टरों ने कहा कि पीरियडस के उन दिनों में सैनेटरी पैड, कपडा लगाने के बजाय कप लगाएं, ये कप मेडिकल ग्रेड सिलिकाॅन से बने होते हैं और माहवारी के दौरान योनि के अंदर कप लगा दिया जाता है। विश्व माहवारी दिवस पर (फाॅग्सी) एवं आगरा आॅब्स एंड गायनी सोसाइटी के द्वारा सोमवार को रेनबो हॉस्पिटल में आयोजित कार्यक्रम में युवा आईवीएफ विशेषज्ञ डा. दीक्षा गोस्वामी ने कहा कि मासिक धर्म कप की अवधारणा भारत में काफी नई है, लेकिन स्त्री रोग विशेषज्ञ कपडे, सैनेटरी पैड और टेंपोन के बजाय इन्हीं के उपयोग को अब बेहतर मानते हैं। इसमें सैनेटरी नैपकिन की तरह सैकडों रूपये खर्च करने की जरूरत भी नहीं होती बल्कि एक बार खरीदकर सालों इस्तेमाल किया जा सकता है। बस जरूरत है साफ-सफाई का ध्यान रखने की।
वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. नरेंद्र मल्होत्रा ने कहा कि हैरत की बात है कि आज के समय में भी इसके साथ सामाजिक कलंक जैसी बातें और अज्ञानता जुडी है। इस महत्वपूर्ण मुददे पर चुप्पी तोडना और जागरूकता लाना ही इस कार्यक्रम का उददेश्य है। उन्होंने कहा कि माहवारी को लेकर समाज में जो मिथ एवं पुरानी अवधारणाएं बनी हुई हैं उन्हें खत्म करना है। माहवारी महिला के शरीर में होने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है।

आओ लें प्रण, नहीं करेंगे अपनी बच्चियों का तिरस्कार…..
इस जागरूकता कार्यक्रम में उपस्थित लडकियों और महिलाओं ने डाॅक्टरों से माहवारी के दौरान होने वाली परेशानियों का समाधान जाना। उन्होंने डाॅक्टरों से सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासाएं शांत कीं। रेनबो हाॅस्पिटल कीं वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. मनप्रीत शर्मा ने उपस्थितजनों को यह प्रण दिलाया कि माहवारी को लेकर चली आ रहीं पुरानी अवधारणाओं, मिथकों और अज्ञानता के चलते वह अपनी बच्चियों का तिरस्कार नहीं करेंगे। उन्हें बिस्तर की जगह जमीन पर सोने को नहीं कहेंगे, रसोई में जाने से नहीं रोकेंगे, स्कूल जाने से नहीं रोकेंगे, खाना बनाने से नहीं रोकेंगे।
टैम्पोन भी है बेहतर विकल्प….
डा. शैली गुप्ता ने बताया कि पीरियडस के दौरान टैम्पोन भी बेहतर विकल्प है। सैनेटरी नैपकिन्स की जगह इन्हें इस्तेमाल किया जा सकता है। टेम्पोन रूई का एक छोटा प्लग होता है जो पीरियड्स के रक्त को अवशोषित करता है।
82 प्रतिशत महिलाएं नहीं जानतीं सैनेटरी पैडस क्या हैं?
फाॅग्सी की संयुक्त सचिव डा. निहारिका मल्होत्रा बोरा ने बताया कि देश में माहवारी को लेकर जागरूकता का अभाव है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आज भी 82 प्रतिशत महिलाएं नहीं जानतीं कि सैनेटरी पैडस क्या हैं, सिर्फ 18 प्रतिशत महिलाएं ही इनका इस्तेमाल करती हैं। इसकी वजह से 70 प्रतिशत महिलाएं रिप्रोडक्टिव ट्रैक्ट इनफेक्शन से पीडित हैं। जहां तक कपडे की बात है तो यह एक पुराना तरीका है पर बार-बार कपडे का उपयोग करना, गंदे कपडे का उपयोग करना भी महिलाओं को खतरे में डालता है।