
नवनिर्मित बंदायू मेडिकल कॉलेज में 20 अक्टूबर को ओपीडी शुरू होनी है, इसके लिए डॉक्टरों से लेकर दवाएं और संसाधन एसएन मेडिकल कॉलेज से भेजे जा रहे हैं। ऐसे में जिन डॉक्टरों को बंदायू जाने के आदेश दिए गए हैं, वे परेशान है। वे अपने घर को छोडकर नहीं जाना चाहते हैं। हालांकि उनसे कहा जा रहा है कि ओपीडी शुरू होने के बाद वे वापस आ जाएंगे। मगर अपनी निजी प्रैक्टिस में जुटे डॉक्टर एक सप्ताह क्या, एक घंटा भी बर्बाद नहीं कर सकते हैं। इन डॉक्टरों के लिए बंदायू जाना अपना समय बर्बाद करना है। इस अतिरिक्त काम से डॉक्टरों को कोई आर्थिक और व्यक्तिगत लाभ भी नहीं होने वाला है। इसे देखते हुए सभी विभागों ने सबसे जूनियर डॉक्टरों को भेजने की सूची तैयार कर ली है। इसे लेकर विरोध होने लगा है।
एसएन से ही चलेगा बंदायू
बंदायू मेडिकल कॉलेज के लिए एसएन के एसपीएम विभागाध्यक्ष डॉ एसके मिश्रा को प्राचार्य बनाया गया है और नोडल अधिकारी बाल रोग विभाग के डॉ नीरज यादव हैं। नए मेडिकल कॉलेज में भर्तियां भी होनी है, इस पर सत्ता धारी नेताओं की नजरें टिकी हुई हैं। इसे देखते हुए कोई भी डॉक्टर बंदायू मेडिकल कॉलेज की जिम्मेदारी नहीं लेना चाहता है, उन्हें आशंका है कि वहां सत्ता के दबाव में सब काम करने पडेंगे और मिलेगा भी कुछ नहीं, सरकार बदलते ही जांच होती है तो वे ही फंसेंगे।
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