आगरालीक्स.. आगरा सहित यूपी के मिर्जापुर और वाराणसी में अमित शाह के दौरे के बाद चर्चाएं तेज हो गईं हैं। लोकसभा चुनाव 2019 में सांसदों की टिकट कट सकती है, नए चेहरों को चुनाव में पार्टी का प्रत्याशी बनाया जा सकता है। इससे आगरा सहित प्रदेश के सांसद परेशान हैं और वे टिकट पक्की करने की जुगत में लग गए हैं।
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में यूपी की 80 सीटों में से भाजपा के अपने 71 और सहयोगी दल अपना दल के दो सांसद जीते थे। इनमें गोरखपुर, फूलपुर और कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव भाजपा हार चुकी है। ऐसे में मौजूदा समय में भाजपा के 68 सांसद रह गए हैं।
भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने यूपी में अपनी पार्टी के सभी 68 सांसदों के रिपोर्ट कार्ड तैयार कर लिए हैं। इनमें आधे सांसदों के चार साल के कामकाज को निराशाजनक बताया गया है। इन सांसदों के बारे में नेतृत्व के पास यह फीडबैक है कि दोबारा इन्हें प्रत्याशी बनाया तो क्षेत्रीय जनता इन्हें जिताकर संसद नहीं भेजेगी।
ऐसे सांसदों में से कुछ पिछड़े और दलित सांसद भी हैं, जो भाजपा के खिलाफ ही बगावत का बिगुल फूंक चुके हैं। कुछ सांसदों के कदाचरण की शिकायतें पीएम नरेन्द्र मोदी व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास हैं। इनके स्थान पर चुनाव मैदान में उतारने के लिए नए चेहरे तलाशे जा रहे हैं।