आगरालीक्स …आगरा सहित यूपी के 50 हजार डॉक्टर बेरोजगार हो जाएंगे, 5 हजार हॉस्पिटल बंद होंगे, एक लाख स्टॉफ की नौकरी जाएगी। डॉक्टरों के लिए क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट काला कानून है, इसे स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए तैयार किया जाना था, लेकिन एक्ट बनाने वाली समिति में डॉक्टर ही नहीं रखे गए। यह लागू होता है तो 50 हजार डॉक्टर बेरोजगार हो जाएंगे। जिन प्राइवेट डॉक्टरों पर देश की 70 फीसदी स्वास्थ्य सेवाएं निर्भर हैं, उन्हीं का ध्यान नहीं रखा गया है। रविवार को होटल रेडिसन ब्लू में यूपी नर्सिंग होम एसोसिएशन के 17 वें वार्षिक सम्मेलन में क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट, पीसीपीएनडीटी एक्ट, मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट, मेडिको लीगल केस पर चर्चा की गई।
यूपी नर्सिंग होम एसोसिएशन के सचिव डॉ देवेंद्र मौर्या ने बताया कि क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के लागू होने के बाद फाइव स्टार और कारपोरेट हॉस्पिटल ही रह जाएंगे। सस्ता इलाज कर रहे छोटे छोटे नर्सिंग होम बंद हो जाएंगे। इससे यूपी के पांच हजार हॉस्पिटल पर ताले लग जाएंगे, 50 हजार डॉक्टर बेरोजगार हो जाएंगे, इन हॉस्पिटल में काम करने वाले एक लाख प्रशिक्षित स्टाफ की नौकरी चली जाएगी। एक्ट के तहत हॉस्पिटल के लिए 27 तरह की एनओसी चाहिए, इन एनओसी के लिए विभागों में चक्कर लगाकर ही डॉक्टर परेशान हो जाएंगे। इससे इलाज भी महंगा होगा। एक्ट को लागू करने का विरोध किया जा रहा है, रिव्यू कमेटी गठित की गई है, इसमें हॉस्पिटल खोलने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम के साथ ही अन्य सख्त नियमों को समाप्त करने की मांग की जा रही है। जिससे मरीजों को सस्ता और अच्छा इलाज मिल सके। मेडिकोलीगल एक्सपर्ट डॉ देवेंद्र गुप्ता ने बताया कि मरीज के आॅपरेशन से पहले उसकी सहमति ले लें। मरीज के इलाज के सभी रिकॉर्ड रखें, यह मरीज का अधिकार होता है कि वह अपने इलाज संबंधी रिकॉर्ड ले सके। डॉक्टर को 72 घंटे में रिकॉर्ड उपलब्ध कराने होते हैं। मेडिकोलीगल केस को पुलिस को भी रिपोर्ट करें। इसका रिकॉर्ड संभाल कर रखें। कांफ्रेस के चेयरमैन डॉ आरएन गोयल ने बताया कि पीसीपीएनडीटी एक्ट की जानकारी न होने से डॉक्टरों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। एक्ट के तहत डॉक्टर को रजिस्ट्रेशन करना होता है, वह एक से अधिक अल्ट्रासाउंड मशीन रख सकता है, लेकिन रजिस्ट्रेशन में मशीनों की संख्या का ब्योरा देना चाहिए। दिल्ली और महाराष्ट्र में दो जगह से अधिक अल्ट्रासाउंड करने के लिए डॉक्टरों को स्टे दिया है, ऐसे में अन्य राज्यों में भी इस ऑर्डर का इस्तेमाल किया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग की टीम अल्ट्रासाउंड सेंटर की जांच करती है तो उसकी रिपोर्ट की फोटोकॉपी अपने पास सुरक्षित रखें। उन्होंने बताया कि ट्रैकिंग और ऑनलाइन रिकॉर्ड दर्ज करना शुरू नहीं हुआ है, यह प्रक्रिया अभी चल रही है। एसोसिएशन के पैटर्न डॉ एसके भसीन ने कहा कि डॉक्टर पांच दिन काम करें, एक दिन हॉस्पिटल के रिकॉर्ड चेक करने में लगाएं और एक दिन अपने परिवार को दें। जिससे वे स्वस्थ्य जिंदगी जी सकें। आइएमए, आगरा के अध्यक्ष डॉ आरएस कपूर ने बताया कि डॉक्टर और मरीज के बीच के संबंध सुधारने के लिए स्टाफ का व्यवहार भी अच्छा होना चाहिए। सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ एचएस असोपा, डॉ एसके भसीन, एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ आरके अग्रवाल, आगरा एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ एससी साहू, चेयरमैन डॉ आरएन गोयल, सचिव डॉ प्रदीप चावला, डॉ राजीव गुप्ता, डॉ सुरेश कुशवाह, डॉ अरविंद यादव, डा आलोक मित्तल ने स्मारिका का विमोचन किया। इस दौरान डॉ नरेंद्र मल्होत्रा, डॉ मुकेश गोयल, डॉ मनोज जैन, डॉ संजय धवन, डॉ तरुण सिंघल, डॉ सचिन मल्होत्रा, डॉ संजीव मेरठिया, डॉ अरुण जैन, डॉ पीयूष प्रसाद, डॉ अनुपम गुप्ता, डॉ मोहन भटनागर, डॉ गौरव, डॉ दीपक गुप्ता, डॉ एसके वर्मन, डॉ मुकेश जैन सहित यूपी के विभिन्न शहरों से 300 डॉक्टर मौजूद रहे।
डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए क्विक रेस्पोंस टीम
इलाहबाद में डॉक्टर के साथ मारपीट के बाद दो साल पहले एक क्विक रेस्पोंस टीम गठित की गई है। इसमें डॉक्टरों के साथ निजी सुरक्षा कर्मी हैं। हॉस्पिटल में तोडफोड और हंगामा होने के कुछ ही देर में यह टीम पहुंच जाती है, इसके बाद से इलाहाबाद में दो साल में डॉक्टरों के साथ कोई घटना नहीं हुई है। सम्मेलन में यूपी की सभी जिला इकाईयों में इस तरह की रेस्पोंस टीम बनाने का निर्णय लिया गया।
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