आगरालीक्स ..यमुना एक्सप्रेस वे पर 200 किमी/घंटा से अधिक की स्पीड पर गाडियां दौड रही हैं, पिछले 24 घंटे में 10 हजार गाडियां 150 किमी/घंटा की स्पीड से दौडी हैं, एक्सप्रेस वे पर हादसों का एक बडा कारण गाडियों के हाई स्पीड में दौडना माना जा रहा है।
कुबेरपुर से परी चौक तक 165 किमी के यमुना एक्सप्रेस-वे पर टोल प्लाजा के अलावा जगह-जगह कैमरे लगे हैं। इन कैमरों में गाड़ी की स्पीड से लेकर सारी गतिविधि रिकार्ड होती है। इंचार्ज कॉरीडोर कंट्रोल, यमुना एक्सप्रेस-वे मेजर मनीष का कहना है कि एक्सप्रेस-वे पर दुर्घटनाओं का बड़ा कारण ओवरस्पीड है। हर दिन करीब 70 प्रतिशत वाहन ओवरस्पीड पर दौड़ रहे हैं। रोज 200 से ऊपर तक की स्पीड दर्ज हो रही है। ट्रैफिक पुलिस न होने के कारण लोगों को डर नहीं है।
एक्सप्रेस वे पर वाहन सुरक्षा सप्ताह शुरू किया गया है जो 29 अगस्त तक चलेगा। पहले दिन ऐसे वाहनों को रोका गया जो 150 या इससे अधिक रफ्तार से दौड़ रहे थे। इनकी गति मीटर से चेक करके इन्हें अगले टोल प्लाजा पर रोका गया। कंपनी के अधिकारी मेजर ( रिटायर्ड ) मनीष ने बताया कि सोमवार को लगभग आठ हजार गाड़ियां ओवरस्पीड पाई गई जबकि मंगलवार को आंकड़ा 2173 रहा।
एक्सप्रेस वे कर्मचारियों ने इनकेचा लकों को रोककर उनसे गति 100 से अधिक न करने की गुजारिश की। उन्हें यह भी बताया कि सीट बेल्ट अवश्य लगाएं। कई चालकों ने सीट बेल्ट नहीं लगाई थी। कई गाड़ियों पर रिफ्लेक्टर भी नहीं लगे थे।
ओवर स्पीड का नहीं है डर
एक्सप्रेस-वे से गुजरने वाले वाहनों की स्पीड भले ही कैमरों में दर्ज हो रही हो, मगर लोग मानने को तैयार नहीं हैं। तय मानक 110 किमी/ घंटा की रफ्तार का है। मगर यहां तो लोग रफ्तार के मामले में 200 का आंकड़ा भी पार कर रहे हैं। एक्सप्रेस-वे पर यदि ट्रैफिक पुलिस की तैनाती हर टोल प्लाजा पर हो तो मौत की इस रफ्तार को थामा जा सकता है।
रात में ज्यादा हो रहे हादसे
एक्सप्रेस वे अथारिटी ने हादसों का अध्ययन कराया तो इसमें यह बात सामने आई कि दिन की अपेक्षा रात में हादसे ज्यादा हुए हैं। इनमें भी नोएडा से आगरा के बीच अलीगढ़ और मथुरा के क्षेत्र में ज्यादा दुर्घटना हो रही हैं। इसकी वजह ड्राइवरों को नींद की झपकी लग जाना मानी गई। उन्हें जगाए रखने के लिए एक्सप्रेस वे पर रंबल स्ट्रिप भी लगवाई गई।
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