आगरालीक्स …आगरा में यमुना डूब क्षेत्र में बनी कॉलोनी और निर्माण कार्य में से 85 फीसद ढहाने लायक हैं, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सुनवाई के बाद यह कहा है। इसके बाद से खलबली मची हुई है। रियल एस्टेट कंपनियों को दो दिन में जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है।
सोमवार को एनजीटी के चेयरपर्सन जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से उपस्थित वकील से कहा कि वह सरकार से स्पष्ट निर्देश लेकर आएं कि क्या वह नए सिरे से डूब क्षेत्र का निर्धारण करना चाहती है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 22 नवंबर को होगी। पीठ ने कहा कि स्थानीय आयुक्त की रिपोर्ट में सरकारी विभागों के कामकाज में कमियां मिली हैं। यमुना नदी के डूब क्षेत्र से विभिन्न रियल एस्टेट परियोजनाओं की दूरी मापने में भी काफी गड़बड़ी की गई है। यमुना के डूब क्षेत्र में स्थित 85 फीसदी इमारतें ढहाए जाने लायक हैं। एनजीटी ने स्थानीय आयुक्त की रिपोर्ट पर मामले के अन्य पक्षों और विभिन्न रियल एस्टेट कंपनियों से दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।
23 और 24 सितंबर को कोर्ट कमिश्नर ने किया था निरीक्षण
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के कोर्ट कमिश्नर मुकेश कुमार गुप्ता ने 23 और 24 सितंबर को 13 प्रोजेक्ट का निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपी थी। कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट में हर प्रोजेक्ट के पास लगे पिलर और नदी को पाटने का ब्योरा पेश किया गया है। साल 2010 में आई बाढ़ को आधार मानते हुए लगाए गए 103 पिलरों और निशानों में कई गड़बड़ियां हैं, मलबे और गलत तरीके से लगाए गए पिलरों पर भी रिपोर्ट में टिप्पणी की गई है।
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