आगरालीक्स…भाजपा सांसद रामशंकर कठेरिया को दो साल की सजा. कठेरिया बोले—आगे अपील करूंगा. कांग्रेस ने कहा—रद हो सदस्यता
आगरा के पूर्व सांसद और वर्तमान में इटावा से सांसद रामशंकर कठेरिया को एमपी/एमएलए कोर्ट ने शनिवार को दो साल की जेल और 50 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है. उन्हें बिजली सप्लाई करने वाली कंपनी टोरंट के अधिकारी के साथ मारपीट और बलवा करने का दोषी करार दिया गया है. सजा के बाद सांसद रामशंकर कठेरिया ने कहा कि वह कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं लेकिन अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए आगे अपील करूंगा. वहीं सांसद को सजा सुनाए जाने के बाद कांग्रेसियों ने सांसद रामशंकर कठेरिया की सदस्यता को रद करने की मांग की है. उनका कहना है कि जब मोदी सरनेम के कारण राहुल गांधी को सजा हो सकती है और उनकी सदस्यता रद की जा सकती है तो रामशंकर कठेरिया की भी सदस्यता को रद किया जाना चाहिए.
जानें पूरा मामला
मामला 16 नवंबर 2011 का है. इस दिन दोपहर को टोरंट पावर लिमिटेड आगरा के साकेत माल स्थित आफिस में मैनेजर भावेश रसिक लाल शाह बिजली चोरी से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहे थे, तभी स्थानीय सांसद रामशंकर कठेरिया 10—15 समर्थकों के सााि आए और भावेश रसिक लाल शाह के साथ मारपीट शुरू कर दी. इसमें शाह को काफी चोटें आई थीं. घटना को लेकर टोरंट पावर के सुरक्षा निरीक्षक समेधी लाल ने थाना हरीपर्वत में तहरीर दी थी और सांसद रामशंकर कठेरिया और उनके समर्थकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था. थाना पुलिस ने कठेरिया के खिलाफ ही कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी. इसी मामले में गवाही और बहस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आज सांसद रामशंकर कठेरिया को दो साल का कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है.
जानिए क्या कहना है कठेरिया का
कोर्ट से बाहर निकलने के बाद सांसद रामशंकर कठेरिया ने कहा कि शमसाबाद रोड पर एक महिला कपड़ों पर प्रेस करती है. उनका एक टोरंट से जुड़ा मामला था. उनका बिल ज्यादा आ गया था. वो महिला मेरे पास अपनी शिकायत लेकर आई, फिर मैंने टोरंट के अधिकारियों से बात की तो उन्होंने कहा कि बिल ठीक कर दिया जाएगा. लेकिन 8 दिन बाद वह महिला अपने बच्चों को लेकर फिर से उनके पास आई ओर कहा कि मेरा बिल कम नहीं हुआ है. मैं सुसाइड कर लूंगी और रोने लगी.
सांसद ने बताया कि इसके बाद वह वहां से उठकर टोरंट आफिस गए और मैंने कहा तो बताया बिल ठीक हो गया है. सांसद का कहना है कि उस समय बसपा की सरकार थी और राजनीति के चलते मेरे ऊपर कई मुकदमे लिखे गए थे. उसी क्रम में यह मुकदमा भी लिखा गया था जिसमें जो वादी थे उन्होंने लिखा कि सांसद ने ऐसा कुछ नहीं किया. गवाओं ने भी कहा कि सांसद जी को तो हमने आफिस में देखा भी नहीं. इन सबके बावजूद धारा 300 और 147 में मुकदमा लिखा गया. आज कोर्ट ने दो साल की सजा सुनाई है, 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. मैं कोर्ट के फैसले का सम्मान करता हूं और स्वीकार करता हूं. अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए आगे अपील करूंगा. सांसद के अधिवक्ता की ओर से पेश किए गए जमानत प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने उन्हं जमानत देदी है.