आगरालीक्स…आगरा के रेनबो आईवीएफ की एमडी और बांझपन विशेषज्ञ डॉ जयदीप मल्होत्रा ने वर्ल्ड हेल्थ समिट में दी मां, नवजात और बाल स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जानकारी. स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका पर भी दिया जोर
मातृ, नवजात और बाल स्वास्थ्य (एमएनसीएच) सुधार में स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका पर जोर देते हुए रेनबो आईवीएफ की एमडी और बांझपन विशेषज्ञ डॉ. जयदीप मल्होत्रा ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मी अग्रिम पंक्ति के योद्धा हैं, लेकिन उन्हें गंभीर वैश्विक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड हेल्थ समिट में शनिवार को डॉ. मल्होत्रा ने कहा कि सबसे बड़ी समस्या कुशल स्वास्थ्य कर्मियों की कमी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2030 तक 1 करोड़ स्वास्थ्य कर्मियों की वैश्विक कमी होगी, जिससे स्वास्थ्य प्रणाली पर हर वर्ष 500 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण व दूरदराज़ क्षेत्रों में एमएनसीएच देखभाल की पहुंच बेहद सीमित है, क्योंकि स्वास्थ्य कर्मी शहरी क्षेत्रों में अधिक केंद्रित हैं।
डॉ. मल्होत्रा ने नवजात और प्रसवोत्तर देखभाल में लक्षित प्रशिक्षण की कमी, सॉफ्ट स्किल्स का अभाव और खराब कार्य परिस्थितियों के कारण स्वास्थ्य कर्मियों के तेजी से क्षेत्र छोड़ने की समस्या को भी रेखांकित किया। कोविड-19 महामारी के दौरान 50 फीसदी स्वास्थ्य कर्मियों ने थकावट का अनुभव किया, जिससे एमएनसीएच सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने के लिए समानता, समावेशन और निवेश पर आधारित प्रणालीगत बदलाव आवश्यक हैं। इसके तहत टास्क शिफ्टिंग और अपस्किलिंग जैसे उपायों को बढ़ावा देना चाहिए।
भारत के आशा कार्यक्रम का उदाहरण देते हुए डॉ. मल्होत्रा ने बताया कि एक मिलियन से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्यi कार्यकर्ताओं ने संस्थागत प्रसव बढ़ाने, टीकाकरण सुनिश्चित करने और प्रसवपूर्व देखभाल में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने सुझाव दिया कि डिजिटल स्वास्थ्य तकनीकों का उपयोग कर सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण और डेटा रिपोर्टिंग से जोड़ा जाए। इससे सेवा की गुणवत्ता, रियल टाइम डेटा संग्रह और उपचार मार्गदर्शन में सुधार होगा। डॉ. मल्होत्रा ने जोर देकर कहा कि जब सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाता है, तो वे सांस्कृतिक बाधाओं को पार कर प्रभावी सेवा प्रदान कर सकते हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर एमएनसीएच परिणामों में ठोस सुधार संभव है।
इस अवसर पर डब्ल्यूएचओ की रीजनल डायरेक्टर साइमा वाजेद, यूनिसेफ रोसा के रीजनल डायरेक्टर संजय वाजसेकेरा, सेंटर फाॅर कैटालिंग चेंज एंड नेशनल काॅर्डिनेटर की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुतापा नेओगी, सी3 की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर अपराजिता गोगोई, इंपैक्ट एंड हेल्थकेयर सिमुलेशन की डायरेक्टर रश्मी जीवी आराध्या,फैमिली हेल्थ के डिप्टी डायरेक्टर विकास यादव, पीएमएनसीएच के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टी रजत खोसला, पीएमएनसीएच की बोर्ड चेयर हेलन क्लार्क आदि माैजूद थे।