आगरालीक्स…आगरा के उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल में डॉ. सुदेश ने हार्ट में पर्दा बनाकर बचाई मरीज की जान. मरीज हृदय के बाएं और दाएं चैंबरों के बीच कोई विभाजन (पर्दा) नहीं है, हार्ट भी तीन गुना अधिक बड़ा हो गयाथा..
हार्ट की कॉमन एट्रियम जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही एक महिला मरीज की हार्ट का पर्दा बनाकर और वाल्व रिपेयर कर उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल में जान बचाई गई। मरीज के हृदय में चैंबरों के बीच प्राकृतिक रूप से पर्दा नहीं बना था, जिससे उसे काफी परेशानियां हो रही थीं। पर्दा पेरीकार्डियम से बनाया गया। अब मरीज पूरी तरह स्वस्थ है।कार्डिएक थोरासिक एवं वैस्कुलर सर्जन डॉ. सुदेश कुमार ने बताया कि मथुरा निवासी गीता के पैर और पेट में सूजन थी। उसे सांस लेने में तकलीफ होती थी और हृदय गति लगातार तेज बनी रहती थी, जिससे वह ठीक से चल-फिर भी नहीं पा रही थी। उसने दिल्ली और जयपुर जैसे बड़े शहरों में इलाज कराया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। जांच में पता चला कि वह कॉमन एट्रियम से ग्रसित है यानी उसके हृदय के बाएं और दाएं चैंबरों के बीच कोई विभाजन (पर्दा) नहीं है। हार्ट भी सामान्य से लगभग तीन गुना बड़ा (1.5) हो गया था, जबकि सामान्य आकार 0.5 होना चाहिए।
ऑपरेशन में आईं ये बड़ी चुनौतियां
- बेहोश करना भी था खतरनाक – मरीज की स्थिति इतनी नाजुक थी कि एनेस्थीसिया देते समय ही उसकी जान जा सकती थी।
- दिल के चैंबरों की पहचान मुश्किल– पर्दा न होने के कारण यह तय करना कठिन था कि कौन-सा भाग लेफ्ट एट्रियम है और कौन-सा राइट।
- हार्ट ब्लॉक का खतरा – सर्जरी के दौरान दिल की धड़कन रुकने का भी जोखिम था।
डॉ. सुदेश और उनकी टीम ने धैर्यपूर्वक मरीज को धीमी एनेस्थीसिया देकर हृदय को खोला। फिर दिल की बाहरी परत (पेरीकार्डियम) का 75 प्रतिशत हिस्सा निकालकर उससे एक नया पर्दा तैयार कियाऔर उसे हृदय में फिट किया। साथ ही, लीक कर रहे वाल्व को भी रिपेयर किया गया। सर्जरी के बाद मरीज को अस्थायी पेसमेकर पर रखा गया। मरीज अब स्वस्थ है और पहले से बेहतर महसूस कर रही है।