आगरालीक्स…सड़क दुर्घटना में वाहन स्वामियों के लिए अनिवार्य हो व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा. आगरा के अधिवक्त केसी जैन की पहल—केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी और परिवहन सचिव को भेजा पत्र, की ये मांग
वर्तमान में मोटर वाहन अधिनियम के अन्तर्गत थर्ड पार्टी इन्श्योरेन्स पाॅलिसी का लिया जाना अनिवार्य है जिसका लाभ न तो वाहन स्वामी की मृत्यु होने या घायल होने पर नहीं मिल पाता है और न ही निजी वाहन में बैठे यात्रियों को जो सड़क दुर्घटना की स्थिति में एक बड़ी आर्थिक मानवीय समस्या उत्पन्न करता है। इसको देखते हुए मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन कर वाहन स्वामी व निजी वाहन में बैठे यात्रियों का बीमा अनिवार्य किया जाना चाहिए ताकि हादसा होने की स्थिति में उनका इलाज और उनको मुआवजा मिल सके। इस मुद्दे को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सड़क सुरक्षा एक्टिविस्ट के0सी0 जैन द्वारा केन्द्रीय परिवहन सड़क व राजमार्ग मंत्री नितीन गडकरी एवं परिवहन सचिव वी उमाशंकर को पत्र भेजकर मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन की महत्वपूर्ण मांग की है।मौजूदा बीमा व्यवस्था-अधूरी सुरक्षा
वर्तमान में मोटर वाहन अधिनियम, 1988 में वाहन स्वामी और यात्रियों के लिए व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा अनिवार्य नहीं है।
केवल इन्श्योरेन्स रेगूलेटरी डवलपमेन्ट आॅफ अथाॅरिटी के द्वारा जारी निर्देशों के क्रम में वाहन स्वामी अनिवार्य व्यक्तिगत एक्सीडेन्ट कवरेज ने सकता है जिसके लिये उसे रू0 750/- प्रति वर्ष देने होते हैं और उसका रू0 15 लाख का बीमा कवर होता है। लेकिन अधिकांशतः दोपहिया वाहन स्वामी वाहन क्रय के एक वर्ष के लिये 1 वर्ष की पाॅलिसी लेते हैं लेकिन उसके बाद वह नहीं लेते हैं जिसके कारण हादसा होने की स्थिति में आर्थिक कवर से वंचित होते हैं।
यही स्थिति निजी वाहनों में बैठे सहयात्री की होती है। जिनका इन्श्योरेन्स कवर प्रायः नहीं दिया जाता है।
परिणामस्वरूप, लाखों वाहन चालक व यात्री दुर्घटना के बाद इलाज और पुनर्वास की लागत उठाने में असमर्थ हो जाते हैं।
सड़क हादसों की भयावह सच्चाई
मोटर परिवहन मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में भारत में 1,68,491 लोगों ने सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाई
एनसीआरबी (2021) के अनुसार, 1,55,622 मौतें दर्ज हुईं, जिनमें से केवल दोपहिया वाहनों से जुड़े हादसों में ही 69,240 जानें गईं।
देश में लगभग 26 करोड़ दोपहिया वाहन और 5 करोड़ कारें हैं- यह अनुपात दुर्घटना जोखिम को और गंभीर बनाता है।
इन हादसों में प्रायः वाहन स्वामी और यात्री बिना किसी बीमा कवरेज या आर्थिक सुरक्षा के भारत में लगभग 50 प्रतिशत वाहन बिना बीमा के सड़कों पर चल रहे हैं।
प्रस्तावित विधेयक-मोटर व्हीकल्स (अमेन्डमेन्ट) बिल, 2025
अधिवक्ता जैन द्वारा मोटर वाहन अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन का प्रारूप भी विधेयक के रूप में भेजा है जिसका उद्देश्य वाहन स्वामी एवं सहयात्रियों के लिए न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है जो केवल एक तकनीकी संशोधन नहीं बल्कि मानव जीवन की रक्षा का संवेदनशील कदम है। छोटा-सा बीमा प्रीमियम बड़े संकट के समय जीवनरक्षक साबित हो सकता है। प्रस्तावित संशाोधन के मुख्य निम्न बिन्दु हैंः-
- वाहन स्वामी-चालक के लिए व्यक्तिगत दुर्घटना बीमाः
- मृत्यु, स्थायी विकलांगता और चिकित्सा खर्च के लिए ₹15 लाख तक कवरेज।
- यदि वाहन कंपनी, ट्रस्ट या संस्था के नाम पर है, तो निदेशक या अधिकृत प्रतिनिधि को वाहन स्वामी के रूप में माना जाए।
- यदि मालिक-चालक किसी अन्य स्कीम के अंतर्गत पहले से व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा ले चुका है, तो उसे इस अनिवार्यता से वचज-वनज का विकल्प होगा, बशर्ते यह बीमा पॉलिसी तीसरे पक्ष बीमा की अवधि तक मान्य हो।
वाहन की अधिकृत बैठने की क्षमता के अनुरूप प्रत्येक यात्री के लिए बीमा कवरेज न्यूनतम ₹25 लाख प्रति यात्री।
यह बीमा कवरेज थर्ड पार्टी इन्श्योरेन्स पाॅलिसी की अवधि के बरााबर हो।
नियमों का उल्लंघन करने पर ₹2,000 से ₹5,000 तक का जुर्माना।
बार-बार उल्लंघन की स्थिति में 3 माह तक कारावास का प्रावधान।
अभी हाल में 11 अगस्त 2025 को फतेहपुर सीकरी सांसद राजकुमार चाहर द्वारा सड़क हादसों में वाहन स्वामियों के बीमा कवर के लिए अनिवार्य पाॅलिसी के सम्बन्ध में लोक सभा में प्रश्न उठाया था। जिसके अनुसार 01 जनवरी 2019 से बीमा कम्पनियां वाहन स्वामी के लिए पर्सनल एक्सीडेन्ट कवर अलग से भी जारी कर सकती हैं और यदि वाहन स्वामी चाहे तो पैकेज पाॅलिसी के रूप में भी जारी हो सकती हैं।
के0सी0 जैनः ”हमारा उद्देश्य केवल एक कानूनी सुधार नहीं, बल्कि एक संवेदनशील व्यवस्था बनाना है-जहाँ हर दुर्घटना पीड़ित को इलाज का अधिकार मिले और परिवार आर्थिक संकट में न डूबे। यह पहल न्यायसंगत और संवेदनशील समाज की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है।“