आगरालीक्स…न खाना समय पर न सोना समय पर, जंक फूड लग रहा टेस्टी तो मोटापा बढ़ेगा ही. आगरा में डॉक्टरों ने बढ़ते वजन पर की चर्चा, लैप्रोस्कोपिक सर्जरी को बताया वरदान
एसोसिएशन ऑफ मिनिमल एक्सेस सर्जन्स ऑफ इंडिया (अमासी) की ओर से 118वीं अमासी स्किल कोर्स एंड एफमास एग्जाम का आयोजन फतेहाबाद रोड स्थित कलाकृति कन्वेंशन सेंटर में आयोजित की गयी। दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस का शुभारम्भ मुख्य अतिथि वरिष्ठ उघमी व प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रंजना बंसल, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. ज्ञान प्रकाश, अमासी के उपाध्यक्ष डॉ. राजदीप सिंह और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जन डॉ. हिमांशु यादव ने माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रवज्जलित कर किया।अमासी के उपाध्यक्ष डॉ. राजदीप सिंह ने बताया कि अनियमित जीवनशैली, जंक फूड का बढ़ता चलन और कम शारीरिक गतिविधि के कारण वजन बढ़ना अब आम समस्या हो गई है। ऐसे में जब व्यायाम, डाइट और दवाइयों से वजन नियंत्रित नहीं होता, लैप्रोस्कोपिक बैरिएट्रिक सर्जरी एक वरदान के रूप में सामने आती है। लैप्रोस्कोपिक तकनीक के कारण पेट में बड़े चीरे की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि छोटे-छोटे छेदों से ही सर्जरी की जाती है। इससे खून का बहाव कम होता है, दर्द कम होता है और मरीज जल्दी ठीक हो जाता है। बैरिएट्रिक सर्जरी न केवल वजन कम करने में मदद करती है, बल्कि मोटापे से जुड़ी गंभीर बीमारियों—जैसे डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, हार्ट डिजीज और स्लीप एपनिया को भी काफी हद तक नियंत्रित करती है।
संयोजक डॉ. हिमांशु यादव ने बताया कि अमासी का सर्जन्स को आधुनिक तकनीकों से प्रशिक्षित कर देश के हर कोने में जरूरतमंद मरीजों के लिए बेतरह सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास है। सर्जन को अपडेट रखने के लिए इस तरह के कोर्स बहुत जरूरी है। 225 से अधिक सर्जन एंडो ट्रेनर पर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इसमें केरल, श्रीनगर, पटना, कलकत्ता, हैदराबाद, सूरत, भोपाल, लखनऊ, तमिलनाडु, पटियाला आदि स्थानों से सर्जन आए हैं। विशेषज्ञों ने लैप्रोस्कोपिक और स्त्री रोग सर्जरी अपनी अनूठी दृष्टि से उन्नत सर्जिकल तकनीकों, न्यूनतम आक्रामक स्त्री रोग सर्जरी में नए विकास और मरीजों की सुरक्षा और देखभाल में नवाचारों पर चर्चा की। शुक्रवार को स्त्री रोग पर सत्र आयोजित होंगे।डॉ. समीर कुमार ने लैप्रोस्कोपिक प्रक्रियाओं में गैस इन्फ्लेशन की महत्वपूर्णता को दर्शाया और बताया कि सही पेनुमोपेरिटोनियम सुनिश्चित करने से न केवल मरीज की सुरक्षा बढ़ती है, बल्कि सर्जिकल दृश्यता भी बेहतर होती है। इसको सही से करना जोखिमों को कम करने और सर्वोत्तम सर्जिकल परिणाम आते है। लैप्रोस्कोपिक नॉट्स और स्यूचरिंग के बुनियादी सिद्धांत है। इन नॉट-टाईंग तकनीकों में महारत हासिल करने से सर्जिकल दक्षता और मरीज की रिकवरी में कितना सुधार हो सकता है। एक अच्छी तरह से बंधी नॉट सर्जरी में जटिलताओं को कम करने और रिकवरी समय को छोटा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
डॉ. निसार हमदानी ने बताया कि हाइडेटिड लीवर सिस्ट के लैप्रोस्कोपिक उपचार में कैसे न्यूनतम आक्रामक तकनीकें पारंपरिक सर्जरी की तुलना में अधिक सुरक्षित और कम आघातपूर्ण होती हैं, जिससे जटिलताओं का खतरा कम होता है और मरीज की रिकवरी बेहतर होती है। डॉ. एच. एल. राजपूत ने ऑपरेशन थिएटर उपकरणों के कीटाणुशोधन और रख-रखाव पर सत्र में बताया गया कि उच्चतम स्तर के स्वच्छता मानकों का पालन करना क्यों जरूरी है। सही कीटाणुशोधन तकनीकों को नजरअंदाज करना सर्जिकल जटिलताओं का कारण बन सकता है। इस अवसर पर डॉ. प्रशांत लवाणिया, डॉ. अभिनव मित्तल, डॉ. दीपिका चौबे, डॉ. जितेंद्र कुमार, डॉ. करण रावत, डॉ. भुवनेश, डॉ. दीपक, डॉ. सिद्धार्थ, डॉ. अजय, डॉ. यूसुफ, डॉ. अंकुर बंसल, डॉ. अनुभव गोयल आदि मौजूद रहे।