आगरालीक्स… आगरा में नगर निगम के चुनाव रोचक होने जा रहे हैं। भाजपा पदाधिकारी और उनकी पत्नी को टिकट नहीं मिलेगा, ऐसे में किसे टिकट मिलेगी, बसपा दूसरे नंबर की पार्टी थी लेकिन प्रत्याशी हार के डर से पीछे हट रहे हैं। सपा और कांग्रेस में मेयर पद के लिए माहौल बनाया जा रहा है।
राज्य सरकार ने गुरुवार रात को नगर निगम चुनाव केलिए 16 मेयर और 637 अध्यक्षों के आरक्षण की सूची जारी की। इसमें आगरा, इलाहाबाद, बरेली, मुरादाबाद, अलीगढ, झांसी और फैजाबााद के मेयर की सीट अनारक्षित की गई है। इस पर 20 अक्टूबर तक आपत्तियां मांगी गई हैं। उम्मीद है कि आगरा की मेयर की सीट अनारक्षित रहेगी, ऐसे में सबसे ज्यादा दावेदार भाजपा में हैं। ऐसे में भाजपा आला कमान के निर्देशों ने होश उडा दिए हैं, भाजपा पदाधिकारी, सांसद और विधायक की पत्नी और परिजन को टिकट नहीं दी जाएगी। मेयर पद के प्रत्याशी के चयन के लिए कमेटी गठित की गई है। इससे भाजपा से टिकट लेने के लिए दावेदारी कर रहे भाजपा के पदाधिकारी को बडा झटका लगा है। वहीं, सक्रिय कार्यकर्ताओं को उम्मीद जगी है, ऐसे में एक पुराने पदाधिकारी का नाम चल रहा है, हो सकता है उन्हें ही टिकट मिल जाए।
बसपा से रिस्क लेने से डर रहे अच्छे प्रत्याशी
पिछले चुनाव में आगरा में बसपा दूसरे नंबर की पार्टी थी, इस बार सीट आरक्षित होने के बाद मेयर पद के दावेदार सामने आए हैं लेकिन वे रिस्क लेना नहीं चाहते हैं। इससे पैसे भी खूब खर्च होंगे और जीतने की संभावना कम हैं।
सपा और कांग्रेस बना रही माहौल
सपा और कांग्रेस नगर निगम चुनाव के लिए माहौल बना रही है, पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वे नगर निगम चुनाव कांग्रेस के साथ मिलकर नहीं लडेंगे, ऐसे में दोनों पार्टियों की नजर भाजपा और बसपा के असंतुष्ट अच्छे दावेदार पर भी रहेगी।
1989 के बाद से आरक्षित सीट
आगरा मेयर की से 1989 में रमेश कांत लवानियां मेयर बने थे। इसके बाद से आरक्षित श्रेणी की हो गई, बेबीरा रानी मौर्य, किशोरी लाल माहौर, अंजुला माहौर और पिछली बार इंद्रजीत आर्य मेयर पद पर जीते थे, इन सभी ने भाजपा की टिकट से चुनाव लडा था।
मेयर पद पर पिछले चुनाव में किसी कितने वोट मिले
भाजपा 135647
बसपा 123213
सपा 84655
कांग्रेस 29116
कांसेप्ट फोटो