आगरालीक्स…आगरा के अजीत और गुरजीत को सेल्यूट, लंग्स ट्रांसप्लांट करा रहे अंजान मरीज के लिए 1400 किमी का सफर तय करके ओ नेगेटिव ब्लड किया डोनेट
मानवता की मिसाल पेश करते हुए, लोकहितम चैरिटेबल ब्लड सेंटर कमला नगर आगरा के दुर्लभ ब्लड ग्रुप के रक्तदाता अजीत और गुरजीत सिंह ने किम्स हॉस्पिटल हैदराबाद में भर्ती एक मरीज के लंग्स ट्रांसप्लांट (फेफड़ा प्रत्यारोपण) के लिए 1400 किलोमीटर से अधिक की दूरी फ्लाइट से तय करके ओ-नेगेटिव (O-ve) रक्त दान किया। ओ-नेगेटिव सबसे दुर्लभ रक्त समूहों में से एक है, जिसे 'यूनिवर्सल डोनर' माना जाता है, और क्रिटिकल सर्जरी के समय इसकी उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।एटा का मरीज हो रहा है लंग्स ट्रांसप्लांट
(एटा के) एक मरीज पिछले कई महीनों से गंभीर फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहा था और उनके लिए लंग्स ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प बचा था। ट्रांसप्लांट की जटिल सर्जरी के लिए ओ-नेगेटिव रक्त की तत्काल आवश्यकता थी, जो अस्पताल के ब्लड बैंक में उपलब्ध नहीं था एवं ट्रांसप्लांट विगत 12 घण्टों से चल रहा था, तब श्री संतोष कुमार गुप्ता (नवोदय गैस) ने ब्लड सेंटर के महासचिव अखिलेश अग्रवाल को केस की गंभीरता से अवगत कराते हुये मरीज के प्राणरक्षा हेतु विषय रखा जिस पर समन्वयक रोहित अग्रवाल (एड०) ने रक्तदाताओं से संपर्क साधा और आगरा से हैदराबाद जाकर रक्तदान करने के लिए उनकी सहमति प्राप्त की।
जब यह सूचना रक्तदाता अजीत और गुरजीत सिंह तक पहुंची, तो उन्होंने बिना समय गंवाए, आगरा एयरपोर्ट से उड़ान भरकर हैदराबाद पहुंचने का निर्णय लिया। 1400 किमी से अधिक की यात्रा करके, उन्होंने मरीज को ऑपरेशन के दौरान ओ-नेगेटिव रक्त उपलब्ध कराया।
लोकहितम प्रबंधसमिति ने की सराहना
संस्था अध्यक्ष अनिल कुमार अग्रवाल व निदेशक संजीव कुमार जैन ने कहा, "लंग्स ट्रांसप्लांट जैसी बड़ी सर्जरी में रक्त की बहुत आवश्यकता होती है। ओ-नेगेटिव रक्तदाताओं का इतनी दूर से जाकर रक्तदान करना वाकई प्रशंसनीय है। यह निस्वार्थ सेवा न केवल मरीज की जान बचाने में मददगार साबित हुई, बल्कि अंगदान और रक्तदान के महत्व को भी रेखांकित करती है।" प्रबंधसमिति ने रक्तदाताओं के इस अभूतपूर्व सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया है। पूर्व में भी लोकहितम ब्लड बैंक द्वारा दुर्लभ ब्लड बॉम्बे ब्लड ग्रुप की आवश्यकता पड़ने पर महाराष्ट्र से दो डोनर आगरा बुलाए गए थे।
रक्तदाताओं का संदेश:
रक्तदान करने के बाद रक्तदाताओं ने कहा, "रक्तदान महादान है, और ओ-नेगेटिव दुर्लभ ब्लड ग्रुप होने के नाते यह हमारा फर्ज है कि हम जीवन की इस लड़ाई में किसी का सहारा बनें। 1400 किमी का सफर हमारे लिए कोई मायने नहीं रखता, जब सामने किसी की जान बचाने का मौका हो।"