आगरालीक्स…रिश्ता कोई हो, निस्वार्थ प्रेम से बड़ा कुछ नहीं..आगरा के राजदेवम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में जया किशोरी को सुनने हजारों की संख्या में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, सैकड़ों लोगों ने खड़े होकर किया कथा श्रवण
रिश्ता कोई भी हो, यदि उसमें स्वार्थ है तो सब बेकार है। किसी भी रिश्ते में प्रेम में स्वार्थ नहीं होना चाहिए। निस्वार्थ प्रेम वो है जिसमें विश्व को चलाने वाले भी गोपियों के इशारों पर नाचते हैं। अपनी ठकुराई भूल कर पार्थ (अर्जुन) का रथ हांका। प्रेम वश ही श्रीकृष्ण ने दुर्योधन के मेवा त्याग कर विदुर के यहां साग से भोजन किया। सबसे ऊंची प्रेम सगाई, दुर्योधन की मेवा त्यागे, साग विदुर घर खाई… भजन के माध्यम से आज पूज्यश्री जया किशोरी ने निस्वार्थ प्रेम को सबसे ऊपर बताया। श्रीश्याम परिवार सेवा ट्रस्ट द्वारा फतेहाबाद रोड स्थित राजदेवम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आज विश्राम दिवस पर पूज्यश्री जया किशोरी ने जरासंध वध, श्रीकृष्ण की 16 हजार 108 विवाह, सुदाना चरित्र और राजा परिक्षित की मोक्ष कथा का भक्तिमय वर्णन किया। कहा कर्म का परिणाम व्यक्ति को अवश्य मिलता है। सुख हो या दुख, व्यक्ति को जो मिलता है उसके कर्मों का ही मिलता है। ईश्वर ने खुद भी अपने कर्मों का हिसाब किताब रखा और उसे भोगा। अच्छा मिले तो ईश्वर को धन्ववाद दें, बुरा मिले तो नाम जप करें। राजा परिक्षित मोक्ष की कथा के साथ कथा विश्राम हुआ। पूज्यश्रीजया किशोरी के जाने पर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गई। श्रीराधे और हरि बोल के जयकारों के उद्घोष पम्डाल में खूब गूंजे।
पहले सभी वर्ण समाज के लिए करते थे कर्म
पूज्य श्री जया किशोरी ने वर्तमान में वर्णों से बिगड़े स्वरूप पर बोलते हुए कहा कि पहले चार वर्ण कर्म के आधार पर निश्चित होते थे। जो सर्व समाज के लिए कर्म करते थे। ब्राह्मण वर्ण का कर्म समाज को शिक्षित करना, क्षत्रिण का रक्षा, वैश्य का पालन और शूद्र का सेवा करना करना था। परन्तु आज हम सिर्फ अपने लिए कर्म कर रहे हैं, समाज के लिए नहीं।

भजनों पर खूब जूमें भक्तजन
आगरा। ऐसो चटक मटक सो ठाकुर तीनों तीनों लोकन में हूं नाहे…,एक बार हमसे सांवरे नजरे मिलाइये, नजरे मिलाकर फिर मुस्कुराइये…, अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो, दर पे सुदाना गरीब आ गया है…, मीठे रस से भरी रे राधा रानी लागे…, मोहन आवो तो सही, कान्हा के मंदिर में मीराबाई एकली खड़ी… जैसे भजनों पर कथा विश्राम के बाद भी श्रद्धालुओं ने बहुत देर तक भक्ति में डूबकर नृत्य किया।