आगरालीक्स …आगरा में डॉक्टरों ने कहा कि एक हजार डिलीवरी में 39 जुडवा बच्चे जन्म लेते हैं। गर्भ में जुडवा शिशु हैं, गर्भस्थ शिशु में खून की कमी होने पर लेजर विधि से इलाज संभव है। शनिवार से होटल कोर्टियाड बाई मेरियएट में शुरू हुई दो दिवसीय कार्यशाला के पहले दिन रेडियोलॉजिस्ट के लिए गर्भस्थ जुडवा शिशु की जन्मजात विक्रत एक चुनौती और इलाज पर चर्चा की गई।
एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ भूपेंद्र आहूजा ने बताया कि 1980 तक एक हजार डिलीवरी में 19 जुडवा बच्चे होते थे लेकिन अब निसंतान दंपती आईवीएफ की मदद ले रहे हैं। इसमें अधिकांश केस में जुडवा बच्चे होते हैं, इसी तरह से 30 की उम्र के बाद गर्भधारण के लिए हार्मोन थैरेपी देनी पड रही है। इससे 2014 तक एक हजार डिलीवरी में जुडवा बच्चों की संख्या 19 से बढकर 39 तक पहुंच गइ्र्र है। गर्भ में जुडवा शिशु होने पर ट्विन ट्विन ट्रांसफ्यूजन की समस्या आम है। इसमें एक शिशु में खून की मात्रा ज्यादा पहुंचती है और दूसरे में कम होती है। इससे बच्चा कमजोर होता जाता है। वही दूसरे शिशु में खून की अधिकता के कारण हार्ट अटैक की सम्बावना बढ़ जाती है। इस तरह के केस में रेडियोलॉजिस्ट जांच के बाद लेजर विधि से जिस बच्चे में खून की कमी हो रही है, उसकी खून की नलियों की रुकावट को सही कर देते हैं और दोनों जुडवा शिशु स्वस्थ्य जन्म लेते हैं। इसी तरह पहले 20 सप्ताह पर जन्मताज विकृति अल्ट्रासाउंड की मदद से देखी जा सकती थी अब यह 16 से 18 सप्ताह तक देखी जा सकती है। डॉ आहूजा ने जुडवा गर्भस्थ शिशु को रिपोर्ट करने के प्रोटोकाल की जानकारी दी। डॉ. हेमंत पटेल ने बताया कि अल्ट्रासाउंड से बीमारियों का पता न चलने पर ऑब्स एमआरआई किया जाता है। यह गर्भस्थ शिुश के लिए सेफ है।
दिल की बीमारियों का लग रहा सही पता
गर्भस्थ शिशु में 5 से 6 फीसद में दिल की बीमारी होती है, अल्ट्रासाउंड की मदद से इसकी जांच मुश्किल है। ऐसे में अब रेज की वेबलेंथ बढा दी गई हैं, इससे गर्भस्थ शिशु के दिल की धडकन से लेकर ब्लड पफलो का भी सही पता चल सकता है। जन्मजात दिल की बीमारी का इलाज भी संभव है।
मंचासीन अतिथियों में आयोजन मुख्य अतिथि डॉ. सीएस पटेल, आईआरआईए के पूर्व अध्यक्ष व कार्यशाला संयोजक डॉ. भूपेन्द्र आहूजा, आईआरआईए के प्रसीडेंट इलेक्ट डॉ. हेमंत पटेल, चेयरपर्सन डॉ. अरविन्द गुप्ता, आआरआई के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. सुधीर, डॉ. केके पांडे, आयोजन सचिव डॉ. वनज माथुर, डॉ. वंदना आहलूवालिया, डॉ. मौहम्द खालिद, डॉ. अखिलेश शर्मा थे। संचालन डॉ. अंजली गुप्ता ने किया।
कार्यशाला में आयोजन समिति के सदस्यों में मुख्य रूप से डॉ. पंकज नगायच, डॉ. जितेन्द्र चौधरी, डॉ. अनुराग टंडन, डॉ. संजना अरोड़ा, डॉ. सुभाष बालियान, डॉ. अजय बुलागन, डॉ. हरि सिंह आगि उपस्थित थे।
बेटियों की रक्षा के लिए जागरुकता अभियान चलाएगा आईआरए
आगरा। इंडियन रेडियोलॉजिकल एंड इमेजिंग एसोसिएशन के रक्षा कार्यक्रम का यूपी में शुभारम्भ मुख्य अतिथि डॉ. सीएस पंत ने पोस्टर का अनावरण कर किया। कार्यशाला समन्वयक डॉ. भूपेन्द्र आहूजा ने बताया कि रक्षा कार्यक्रम का उद्घाटन मुम्बई में अमिताभ बच्चन ने आआरआईए की राष्ट्रीय कार्यशाला में 28 जनवरी को किया था। इस कार्यक्रम के जरिए एसोसिएशन कन्या भ्रूण हत्या व लिंग परीक्षण के विरोध में लोगों को जागरुक करेगी। आर्गनाइजिंग चेयरपर्सन डॉ. अरविन्द गुप्ता ने बताया कि इस कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए भी कार्यक्रम किए जाएंगे।
इलाज के साथ मरीजों को समय भी दें डॉक्टर
आगरा। आईआरआईए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सीएस पंत ने कहा कि डॉक्टर मरीजों का इलाज करने के साथ उन्हें पर्याप्त समय भी दें। यदि डॉक्टर अच्छी तरह मरीज से बातचीत करते हैं तो आधी बीमारी से मरीज को बिना दवा के ही निजात मिल जाती है।
एमटीपी व अल्ट्रासाउंड रजिस्ट्रेशन एक साथ क्यों ?
आगरा। एक ही डॉक्टर को मेडिकल टर्मिनेश ऑफ प्रिगनेंसी (एमटीपी) व अल्ट्रासाउंड का रजिस्ट्रेशन मिलने से कन्या भ्रूण हत्या की समस्या पर लगाम नहीं लग पा रहा है। डॉ. भूपेन्द्र आहूजा ने बताया कि इसके लिए हम वर्षों से मांग कर रहे हैं। आज तक कोई रेडियोलॉजिस्ट लिंग निर्धारण के मामले आरोपी नहीं हुए। यह गंदा काम अप्रशिक्षित लोग कर रहे हैं। वहीं अलीगढ़ मुस्लिम विवि के डॉ. मौहम्मद खालिद (प्रदेश अध्यक्ष आईआरआईए) ने कहा कि एक ओर रेडियोलॉजिस्ट तीन वर्ष की डिग्री लेकर इस क्षेत्र में आते हैं और दूसरी ओर एमबीबीएस 6 माह की ट्रेनिंग का प्रमाण पत्र लेकर अल्ट्रासाउंड कर सकते हैं। नियमों में यही विसंगतियां हैं जो लिंग निर्धारण कर कन्या भ्रूण हत्या के मामलों में इजाफा कर रहीं हैं और बदनाम रेडियोलॉजिस्ट होते हैं। कार्यशाला में कल इस विषय पर विस्तार से चर्चा होगी।