आगरालीक्स …आगरा में प्लास्टिक की ईंट बनाने की तकनीकी समझाई गई, महिलाएं भी पैकिंग के सामाना से लेकर प्लास्टिक की बोतल से ईंट बना सकती हैं।
ईको ब्रिक यानि प्लास्टिक की ईंटे बनानें की तकनीक होटल गोवर्धन में अनफोल्ड फाउंडेशन, चाइल्ड केयर वेलफेयर सोसायटी व सेव यमुना फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित वर्कशॉप में दी गई। अब प्लास्टिक की ईंटे न सिर्फ छुटकारा दिलाएंगी बल्कि मिट्टी की ईंटों का विकल्प बन मजबूत ईमारतें भी बनाएंगी। सबसे पहले यमुना आरती स्थल पर ईको ब्रिक से ताजमहल का निर्माण किया जाएगा। इससे पब्लिक टॉयलेट, सोफा, बेंच (स्कूल व पार्कों में) ट्रीगार्ड, सहित कई चीजों का निर्माण किया जा सकता है। इंटोनेशिया व फिलिपिन्स जैसे की देशों में ऐसा किया जा रहा है।
अनफोल्ड संस्था की पूनम कुन्द्रा ने ईको ब्रिक (प्लास्टिक की ईंटे) बनाने की तकनीक बताते हुए कहा कि इसमें घर में पेकिंगयुक्त सभी सामान की प्लास्टिक का प्रयोग किया जा सकता है। 1500 मिग्राम की बोलत में लकड़ी की डन्डी की सहायता से लगभग 500 ग्राम प्लास्टिक भर जाती है। इसे जोड़ने के लिए केमिकल का प्रयोग किया जाता है, जो आसानी से मार्केट में मिल जाता है। संस्था द्वारा अब तक 100 किलो की ईंटे बनाई जा चुकी हैं, यानि 100 किलो प्लास्टिक को पर्यावरण को प्रदूषित करने से रोका जा चुका है। रिवर कनेक्ट अभियान के ब्रज खंडेलवाल ने यमुना आरती स्थल पर ईको ब्रिक से जल्दी की एक बेंच बनाने की बात कही। हरविजय वाहिया ने हर व्यक्ति से घर के प्लास्टिक के कचरे से वर्ष में कम से कम एक ईको ब्रिक बनाने का संकल्प लेने के साथ यमुना आरती स्थल पर ताजमहल बनाने की बात कही, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण होगा। अतिथियों का स्वागत व धन्यवाद ज्ञापन ब्रज खंडेलवाल ने दिया। इस अवसर पर मुख्य रूप से श्रवन कुमार, पद्मिनी अय्यर, ज्योति खंडेलवाल, चतुर्भुज तिवारी, नीलम भटनागर, निधि पाठक, डॉ. कृष्ण पाल सिंह आदि उपस्थित थे।
परिवर्तित कर रहा प्लास्टिक
सर्जन डॉ. मीता कुल्श्रेष्ठ ने बताया कि पॉलीथिन को साफ्ट बनाने के लिए प्रयोग किया जाने वाला बीपीए (बिस फिनायल ए) मिट्टी से फल व सब्जियों के जरिए मनुष्य के शरीर में पहुंचकर हार्मोनल असंतुलन पैदा करता है। इनफर्टिलिटी के मामले बढ़ने की एक मुख्य वजह प्लास्टिक भी है। जीन्स को भी परिवर्तित कर रहा है प्लास्टिक है। एक भारतीय प्रतिवर्ष 11 किलो प्लास्टक प्रयोग करता है जबकि एक अमेरिकन 109 किलो। इसके बावजूद वहां की नदिया और पर्यावरण स्वस्छ है। क्योंकि वहां प्लास्टिक निस्तारण ठीक तरह से किया जा रहा है।