आगरालीक्स.. आज परशुराम जयंती है, आगरा में भगवान परशुराम ने कैलाश धाम को स्थापित किया था। यहां दो शिवलिंग हैं, परशुराम के पिता जमदग्नि ऋषि शिवलिंगों को कैलाश पर्वत से लाये थे। मान्यता है, कि जो भक्त सच्चे दिल से इन शिवलिंग के दर्शन करता है, उनकी हर इच्छा पूरी होती है। इस मंदिर की मान्यता इसलिये भी अधिक है,क्योंकि भगवान परशुराम और परशुराम के पिता यमदग्नि ऋषि इन शिवलिंगों को कैलाश पर्वत से लाये थे।
कैलाश से रेणुका धाम लेने गये थे भगवान शिव को
आगरा में रुनकता के पास रेणुका धाम है,जो भगवान परशुराम की मां रेणुका के नाम पर है। आज से 10,500 वर्ष पहले भगवान परशुराम और उनके पिता यमदग्नि कैलाश मंदिर पर पूजा करने जाते थे। हजारों वर्ष की तपस्या से खुश होकर भगवान शिव ने वरदान मांगने को कहा,तो भगवान परशुराम ने महादेव से कहा कि वे उनके साथ रेणुका धाम चलें। क्योंकि मां का स्वास्थ्य सही नहीं रहता है,यहां आने में काफी समय व्यर्थ होता है।यदि आप स्वयं हमारे साथ चलेंगे, तो मां भी आपकी आराधना कर सकेंगी। इस पर भगवान शिव ने कहा वे तो वनवासी हैं.इसलिये कैलाश पर्वत छोड़कर कहीं नहीं जा सकते हैं।लेकिन इस पर्वत के कण कण में विराजमान हूं,आप जिस भी कण को ले जायेंगे,उसमें मैं विराजमान रहूंगा।
कैलाश पर्वत से आये शिवलिंग
भगवान शिव की बात मानकर भगवान परशुराम और उनके पिता यमदग्नि ऋषि दो शिवलिंग लेकर चल दिये। रास्ते में संध्या वंदन का समय होने पर उन्होंने यमुना किनारे दोनों शिवलिंग को एक स्थान पर रख दिया। पूजन के बाद जब इन शिवलिंग को उठाने का प्रयास किया,तो शिवलिंग नहीं हिले। तभी आकाशवाणी हुई कि मैं अचलेश्वर हूं, जिस स्थान पर एक बार स्थापित हो जाता हूं,तो वहीं रहता हूं। इसलिये आप मेरी पूजा करने यहीं आया करें। इसके बाद समय बीतता गया और इन शिवलिंग पर मिट्टी के टीले जम गये।
ऐसे बना मंदिर
महंत महेश गिरी ने बताया कि आज से 1500 वर्ष पूर्व एक गाय का दूध स्वयं ही टीले पर निकलने लगता था। ग्वाले और गांववालों ने जब वहां खुदाई की, तो दोनों शिवलिंग प्रकट हुये। साथ में भगवान परशुराम द्वारा लिखित ताम्रपत्र मिला, जिसमें इन शिवलिंगों का इतिहास लिखा था। उसके बाद इस तीर्थ स्थान पर मंदिर की स्थापना हुई।
महन्त गौरव गिरी ने बताया कि यमुना किनारे बसे इस मंदिर की अद्भुत छटा भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती है। हर सोमवार को भक्तों की भीड़ उमड़ती है। देश विदेश से भक्त दिव्य और चमत्कारी शिवलिगों के दर्शन के लिये यहां आते हैं और भोले बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। डॉ मदन मोहन शर्मा भगवान परशुराम के मंदिर में पंच अभिषेक स्नान कराकर भगवान परशुराम जी को और उनके पिता को वस्त्र धारण करा पूजा अर्चना के बाद आरती की गई श्री कैलाश मंदिर घाट पर की गंगा यमुना मैया की आरती प्राचीन कैलाश मंदिर के घाट पर गंगा यमुना आरती का आयोजन किया गया श्री कैलाश मंदिर पर प्रत्येक सोमवार को श्री यमुना घाट की सफाई के पश्चात् घाट पर चौक पूरन, रंगोली दीप एवं पुष्पों से श्रंगार करके आरती की जाती है।आरती का शुभारम्भ व मार्गदर्शन किया महंत गौरव गिरि केशव गिरी सागर गिरी ने इसी श्रंखला में आयोजक श्री बांके बिहारी वेलफेयर सोसायटी के संस्थापक मदन मोहन शर्मा ने बताया कि यह यमुना आरती प्रत्येक सोमवार शाम को कैलाश घाट पर आयोजित की जाती हैं जिसमें शहर भर के यमुनाप्रेमियों को आमंत्रित कर यमुनाशुद्धिकरण के लिये प्रेरित एवं संकल्प भी करवाया जाता हैं सभी को स्वच्छ भारत का संकल्प दिलाते हुये सभी भक्तों से प्रत्येक सोमवार यमुना घाट की सफाई में योगदान कर आरती में शामिल होने का भी अनुरोध किया ।
आरती में मुख्य रूप से उमाकांत सारस्वत शोभित भार्गव रवि सिसोदिया पिंकू पचौरी विशाल पाठक निशांत जैन विजय कुमार नकुल सारस्वत राहुल कुमार अभिषेक सागर गिरी अमन सारस्वत राहुल आदि उपस्थित थे