आगरालीक्स ..(शरद माहेश्वरी की कलम से)..आगरा से लेकर दुनिया भर में अयोध्या में राम मंदिर पर बहस अंतिम पडाव पर है, मगर कलयुग में रामायण का पाठन करने वाले नहीं मिल रहे हैं। यह वेदना है उन शहरवासियों की जिन्होंने अपने बाल्यकाल से रामायण पढने के लिए युवाओं की भीड लगी हुई देखी है। मगर, अब ऐसा नहीं रहा है, आप अपने घर पर अखंड रामायण का पाठ कराते हैं तो रामायण पढने के लिए पंडित जी और उनकी टोली को बुलाना पडेगा, ये पांच से 10 हजार रुपये लेते हैं, मोलभाव करने पर राम के नाम पर पैसे भी कम कर देते हैं। अच्छा हो कि राम मंदिर बनने के लिए जितना जोश दिखाया जा रहा है, उसका कुछ हिस्सा नई पीढी को राम नाम जपने और मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जिन्होंने मनुष्य अवतार लेकर यह बताया कि जिंदगी में संघर्ष ही संघर्ष हैं इन संघर्षों के बीच मार्यादा का पालन करते हुए कठिन परिश्रम से विजय मिलती है, असत्य पर सत्य की जीत होकर रहती है।

शंकर भगवान ने मां पार्वती को सुनाई थी सबसे पहले रामायण
तुलसीदास जी के अनुसार सर्वप्रथम श्री राम की कथा भगवान श्री शंकर ने माता पार्वती जी को सुनायी थी। जहाँ पर भगवान शंकर पार्वती जी को भगवान श्री राम की कथा सुना रहे थे वहाँ कागा (कौवा) का एक घोंसला था और उसके भीतर बैठा कागा भी उस कथा को सुन रहा था। कथा पूरी होने के पहले ही माता पार्वती को नींद आ गई पर उस पक्षी ने पूरी कथा सुन ली। उसी पक्षी का पुनर्जन्म काकभुशुण्डि के रूप में हुआ। काकभुशुण्डि जी ने यह कथा गरुड़ जी को सुनाई। भगवान श्री शंकर के मुख से निकली श्रीराम की यह पवित्र कथा अध्यात्म रामायण के नाम से प्रख्यात है। अध्यात्म रामायण को ही विश्व का सर्वप्रथम रामायण माना जाता है।
हृदय परिवर्तन हो जाने के कारण एक दस्यु से ऋषि बन जाने तथा ज्ञान प्राप्ति के बाद वाल्मीकि ने भगवान श्री राम के इसी वृतान्त को पुनः श्लोकबद्ध किया। महर्षि वाल्मीकि द्वारा श्लोकबद्ध भगवान श्री राम की कथा को वाल्मीकि रामायण के नाम से जाना जाता है।
रामायण हिन्दू स्मृति का वह अंग हैं जिसके माध्यम से रघुवंश के राजा राम की गाथा कही गयी। यह आदि कवि वाल्मीकि द्वारा लिखा गया संस्कृत का एक अनुपम महाकाव्य है। रामायण में 24,००० श्लोक हैं। इसे आदिकाव्य कहा जाता है और इसके रचयिता महर्षि वाल्मीकि को ‘आदिकवि’ कहा जाता है।