आगरालीक्स..
पृथ्वी पर मनुष्य सबसे ज्यादा नायाब प्राणी है। मनुष्य के पास पृथ्वी की सबसे अनोखी देन है उसकी स्मृति। स्मृति आज भी विज्ञान के लिए एक जटिल चुनौती बनी हुई है। मनुष्य अपनी सारी यादें उम्रभर के लिए सहेज कर नहीं रख सकता। वृद्धावस्था में स्मृति लोप होना आम समस्या है। स्मृति कायम रखने पर अब तक तमाम शोध और अध्ययन हुए हैं। हाल ही में हुए एक शोध में कहा गया है कि यदि आदमी जीवन के प्रति सकारात्मक नजरिया रखता है तो उशकी याददाशअत को कायम रखने में मदद मिलती है।
मैमोरी पर नजरिये का प्रभाव
पूर्व में हुए शोध अध्ययनों में पाया गया है कि बहुत से शारीरिक और भावनात्मक कारण हमारी स्मृति को जिदंगीभर कायम रखने की क्षमता पर नकारात्मक असर डालते हैं। साइकोलॉजिकल साइंस जर्नल में प्रकाशित अध्ययन से ज्ञात होता है कि जो लोग उत्साहित और जोश से लबालब महसूस करते करते हैं, उन लोगों की याददाश्त वृद्धावस्था में भी कम होने की संभावना कम हो जाती है।
ऐसे किया शोध-अध्ययन
शोधकर्ताओं की टीम ने अमेरिका के 991 मध्य आयुवर्ग और अधिक उम्र के लोगों पर अध्ययन किया। इन लोगों के आंकड़ों का विशेष विश्लेषण किया गया। इन सभी लोगों ने तीन समयावधि के राष्ट्रीय अध्ययन में भाग लिया था। ये अध्ययन 1995 और 1996, 2004 से 2006 तक और 2012 और 2014 में किए गए। हर आकलन में प्रतिभागियों ने अपने द्वारा अनुभव किए गए तीस दिनों के विभिन्न सकारात्मक भावों में प्रतिभागियों ने अपनी याददाश्त के प्रदर्शन का टेस्ट भी दिया था। ये टैस्ट प्रस्तुति के तुरंत बाद और फिर 15 मिनट बाद हुए थे।
शोध के निष्कर्ष
शोधकर्ताओं ने सकारात्मक प्रभाव और याददाश्त कमजोर होने, बढ़ती उम्र, लिंग, शिक्षा, निराशा और नकारात्मक प्रभाव के बीच संबंध की पड़ताल की। नार्थ वेस्टर्न विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर और इस शोध की वरिष्ठ लेखिका क्लाडिया हासे ने बताया कि हमारी पड़ताल से पता चलता है कि उम्र बढ़ने के साथ स्मृति कमजोर हो जाती है। इसी विश्वविद्यालय की पीएचसी स्नातक एमिली हिटनर ने बताया कि उच्च स्तर के सकारात्मक वाले व्यक्तियों में एक दशक के समय में बहुत तेजी से याददाश्त कमजोर नहीं हुई। अध्ययन में पाया गया कि उन्ही लोगों की याददाश्त में तेजी से ह्रास हुआ, जिनका सकारात्मक प्रभाव कम था ही नहीं।