आगरालीक्स…. आगरा में करवाचौथी की पूजा शुरू हो गई है, पढे पूजन की विधि, चंद्रमा किस समय निकलेंगे, कैसे दें चंद्रमा को अर्घ्य.
करवाचौथ महात्म्य
छांदोग्य उपनिषद के अनुसार चंद्रमा में पुरुष रूपी ब्रह्मा की उपासना करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इससे जीवन में किसी प्रकार का कष्ट नहीं होता है। दीर्घायु प्राप्त होती है। करवाचौथ व्रत में शिव, पार्वती, कार्तिकेय, गणेश और चंद्रमा का पूजन करना चाहिए। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा होती है। पूजा के बाद मिट्टी के करवे में चावल, उड़द की दाल, सुहाग की सामग्री सास अथवा उसके समकक्ष सुहागिन के पांव छूटकर सामग्री भेंट करनी चाहिए।
सरगी का महत्व
करवाचौथ में सरगी का काफी महत्व है। सरगी सास की तरफ से बहू को दी जाती है। इसका सेवन महिलाएं करवाचौथ के दिन सूर्य निकलने से पहले पहले तारों की छांव में करती हैं। सरगी के रूप में सास अपनी बहू को विभिन्न खाद्य पदार्थ एवं वस्त्र आदि देती हैं। सरगी सौभग्य और समृद्धि का प्रतीक होती हैं।
करवाचौथ की पूजन सामग्री
कुमकुम, शहद, अगरबत्ती, कच्चा दूध, पुष्प, शक्कर, शुद्द घी, मेहंदी, मिठाई, गंगाजल, चंदन चावल, सिंदूर, महावर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूटी, बिछुआ, मिट्टी का टोंटीदार करवा, दीपक, कपूर, गेहूं, बूरा, हल्दी, पानी का लोटा, आसन, छलनी, आठ पूरियों की अठावरी, हलुआ, दक्षिणा के लिए पैसे।
करवाचौथ पूजन विधि
प्रातःकाल नित्यकर्म से निवृत्त होकर संकल्प लें और व्रत आरंभ करें। भगवान की पूजा करें। शाम के समय मां पार्वती की प्रतिमा की गोद में श्रीगणेश को विराजमान करें, उन्हें बालू अथवा सफेद मिट्टी की वेदी अथवा लकड़ी के आसन पर विराजमान करें, इसमें शिव-पार्वती, कार्तिकेय, गणेश औऱ चंद्रमा की स्थापना करें। शिव-पार्वती की पूजा करें। इस दौरान घरों में अपनी अपनी परंपरा के साथ कथा को सुनना चाहिए। शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति के हाथ से जल एवं मिष्ठान खाकर व्रत को खोलें
पूजा एवं चंद्र को अर्घ्य देने का मुहूर्त
चतुर्थी तिथि आरंभ- 03.24 एएम (तीन नवंबर की रात से)
चतुर्थी तिथि समाप्त 05.14 एएम (चार नवंबर की रात तक)
चंद्रोदय 20.15 से (कई स्थानों पर अलग समय पर दिखाई दे सकता है)
पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5.29 से 6.44 तक यह पूजा करने का समय है
चंद्रमा को अर्घ्य देने का समय- 8.15 से 8.50 तक है।