आगरालीक्स ..आगरा में अस्पतालों को रेमडेसिवीर इंजेक्शन दिया जा रहा है, मेडिकल स्टोर पर नहीं है,अस्पताल संचालक तीमारदारों से रेमडेसिवीर लाने के लिए कह रहे हैं, ऐसा क्यों,
कार्रवाई क्यों नहीं।
आगरा में कोरोना के केस लगातार बढ रहे हैं, सक्रिय केस 3700 से पार पहुंच चुके हैं। ऐसे में गंभीर मरीजों के इलाज में समस्या आने लगी है। कोरोना संक्रमित गंभीर मरीजों को अस्पताल में बेड नहीं मिल रहा है, बेड मिल रहा है तो इसके बाद आक्सीजन का संकट। आक्सीजन का इंतजाम किया तो रेमडेसिवीर इंजेक्शन और प्लाज्मा के लिए जंग।
रेमडेसिवीर इंजेक्शन नहीं बचा सकता जान
डब्ल्यूएचओ से लेकर विशेषज्ञ कह रहे हैं कि रेमडेसिवीर इंजेक्शन मरीजों की जान नहीं बचा सकता है। यह एंटी वायरल है, अभी तक हुई स्टडी में सामने आया है कि जिन मरीजों में 95 से नीचे आक्सीजन का स्तर पहुंचता है, उन मरीजों को रेमडेसिवीर पहले दिन दो इंजेक्शन के बाद चार दिन तक एक एक इंजेक्शन दिया जाता है तो अस्पताल में कम दिन रहना पडेगा। मगर, यह जान नहीं बचा सकता है।
तीमारदारों से रेमडेसिवीर इंजेक्शन मंगाना गलत
देश भर में रेमडेसिवीर इंजेक्शन की कमी है। इसके बाद राज्य स्तर पर इंजेक्शन की सप्लाई हो रही है। रेमडेसिवीर इंजेक्शन लखनउ से हर जिले में भेजा जा रहा है, आगरा में एसएन मेडिकल कालेज में रेमडेसिवीर इंजेक्शन आ रहा है। इसके साथ औषधि निरीक्षक द्वारा निजी कोविड अस्पतालों को रेमडेसिवीर इंजेक्शन सप्लाई किया जा रहा है, मेडिकल स्टोर में रेमडेसिवीर इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। इसके बाद भी तीमारदारों से कहा जा रहा है कि वे रेमडेसिवीर इंजेक्शन खरीद कर लाएं।