लखनऊलीक्स…यूपी में अगले साल की शुरुआत में चुनाव. लेकिन भाजपा में नहीं सबकुछ ठीक. नेतृत्व परिवर्तन या कैबीनेट में फेरबदल……
अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव
उत्तर प्रदेश में अगले साल के प्रारम्भ में विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा. पिछले एक पखवाड़े से यह चर्चा आम है कि प्रदेश में चुनाव से पूर्व नेतृत्व परिवर्तन या कैबिनेट में व्यापक फेरबदल होने जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह शुरू से ही योगी के विरुद्ध रहे हैं. मोदी और शाह 2017 में मनोज सिन्हा को यूपी का मुख्यमंत्री बनाना चाते थे लेकिन आरएसएस के दबाव में उन्हें योगी को मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार करने को विवश कर दिया. अब कोरोना की दूसरी लहर के संभाल पाने में योगी सरकार की विफलता और पंचायत चुनावों में अपेक्षित परिणाम नहीं आने के बाद मोदी—शाह को फिर येागी पर हमला करने का मौका मिल गया है. लेकिन आरएसएस फिर योगी का ढाल बन कर सामने खड़ी हो गई है.
योगी को नहीं मिली जन्मदिन की बधाई
मोदी और योगी के बीच तनातनी का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि 5 जून को योगी के जन्मदिन पर न मोदी ने उन्हें बधाई दी और न शाह और नड्डा ने. योगी ने जिस तरह से अपनी ब्रांडिंग की है उससे वह मोदी से बड़े हिंदुत्व का चेहरा बन गए हैं. उन्हें मोदी के बाद अगले पीएम के रूप में प्रोजेक्ट किया जा रहा है. इससे मोदी और शाह खासे नाराज हैं और चाहते हैं कि योगी के पर कतर दिए जाएं. अपनी इसी मंशा को अंजाम देने के लिए मोदी ने अपने साथ 21 साल से काम कर रहे आईएएस अफसर अरविंद शर्मा को समयपूर्व रिटायरमेंट दिलवा कर यूपी में एमएलसी बनवा दिया. मोदी चाहते हैं कि अरविंद शर्मा को प्रदेश मंत्रिमंडल में उपमुख्यमंत्री या गृहमंत्री के पद पर ताजपोशी की जाए. लेकिन योगी इसके लिए कतई राजी नहीं हैं. यह सब जानते हैं कि मोदी और योगी दोनों ही बहुत जिद्दी हैं. दोनों की जिद का अंतत खामियाजा भाजपा को ही भुगतना होगा.
कई विधायक खिलाफ
केंद्रीय नेतृत्व और आरएसएस दोनों जानते हैं कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की छवि बहुत खराब हो चुकी है. इसके लिए योगी की कार्यशैली जिम्मेदार है. आज राज्य के सौ से ज्यादा भाजपा विधायक योगी के खिलाफ हैं. केंद्रीय नेतृत्व और आरएसएस इस बात पर विचार कर रहा है कि योगी के नेतृत्व में चुनाव लड़ने से ज्यादा नुकसान होगा या योगी के किनारा करने से. यदि योगी को किनारा किया गया तो भाजपा में विघटन होने से नहीं रोका जा सकता. केंद्र की ओर से योगी पर लगातार दबाव बनने की कोशिश की जा रही है. अब देखना ये है कि यह कोशिश कितनी सफल होगी. बहरहाल, इतना तो स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश भाजपा में सबकुछ चंगा सा नहीं है.