अलीगढ़लीक्स(चमन शर्मा)…एक दो साल की नन्हीं बच्ची, जो अपनी मां के बगैर एक पल भी नहीं रहती थी और रात को अपनी मां के सिवा किसी के पास नहीं सोती थी, वही बच्ची 2 दिन से अपनी मां से दूर हो और उसका पता भी न हो कि वह किस हालत में है और कहां है , जिन्दा भी है या ….! तो इसका दर्द या तो वह बच्ची महसूस कर सकती है या उसकी मां। मामला है महुआ खेड़ा थाना अंतर्गत क्वार्सी बाईपास के सरोज नगर, गली नं 6 के निकट आ बसे लुहार का काम कर अपने परिवार का पालन कर रहे राजा और रेखा के परिवार का, जिनकी 2 साल की बच्ची शिवानी अपनी मां रेखा के साथ सड़क के किनारे चारपाई पर सोई हुई थी।
दिन की कड़ी मेहनत के बाद रात को बेसुध सोई मां को नहीं पता था कि विगत मंगलवार 22 जून की सुबह जब वह जागेगी तो उसे अपनी नन्हीं बच्ची शिवानी नजर नहीं आऐगी। ऐसा ही हुआ, जैसे ही सुबह तड़के 4 बजे मां जागी, तो उसे अपनी बच्ची नजर नहीं आई , मां के होश ही उड़ गए। इधर उधर तलाशा, पूरे परिवार में हाय तोबा मच गई। मां अपने को कोसने लगी कि मैं इतनी बेसुध न सोेती तो शायद मेरी बच्ची आज मेरे पास होती। मामले की सूचना परिवार ने थाना महुआखेड़ा में दी।
पुलिस तफ्तीश के लिए आई। दो दिन से ज्यादा बीत गए हैं और अभी तक बच्ची शिवानी का कोई सुराग नहीं लगा है। शिवानी की मां रेखा ने अलीगढ़ लीक्स को बताया कि उसके दो पुत्री थीं, जिसमें से एक 10 साल की पुत्री पिछले साल कोरोना में चल बसी और एक बची 2 साल की पुत्री शिवानी को कोई उठा ले गया। अब मां की गोद सूनी हो गई। बच्ची शिवानी को क्यों उठाया गया होगा, इसको लेकर जितने मुंह, उतनी बातें हैं।
सुनने में आया कि कोई गैंग सक्रिय है, जो ऐसे सड़क किनारे रह रहे बंजारों, लुहारों के छोटे-छोटे बच्चों को अपना शिकार बनाकर रात में उठा ले जाता है। अब चाहे यह बच्चे किसी निःसंतान दम्पित को बेच दिए जाते हों, भीख मंगाने के लिए प्रयुक्त होते हों या इन नन्हें बच्चों के अंगों को बेचा जाता हो। ऐसा प्रतीत होता है ऐसे गैंग ने सड़क किनारे बसे बंजारों के बच्चों को टारगेट इसलिए बनाया जाता हो कि यह बाहर सड़क के किनारे सोते हैं, दिन में कड़ी मेहनत और रात में बेसुध नींद में डूब जाना, ज्यादा पढ़ा लिखा न होने के कारण इन बंजारों के द्वारा कोई तगड़ी पुलिस इत्यादि कार्यवाही न नहीं कर पाऐंगे। बच्ची शिवानी के गुम हो जाने के बाद पिता राजा की तबियत भी बिगड़ गई है। मां रेखा ने रोते हुए बताया कि जब रात आती है और सोने को जाती हूं तो अपनी बच्ची शिवानी को अपने पास नहीं पाती तो मन में क्या क्या विचार आने लगते हैं और अपनी बच्ची की याद में उसका फोटो लेकर सो जाती हूं।
शिवानी की दादी रामबेटी ने बताया कि रेखा का बहुत ईलाज कराया, जब यह दो बेटियां हुईं, उसमें से एक पिछले साल चल बसी और बची हुई एक शिवानी को भी कोई उठा ले गया। अब तो बहू की गोद ही सूनी हो गई है और परिवार में मातम छा गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। अगर पुलिस कोई सुराग मिल जाऐ, तो यूपी पुलिस तो ऐसी है कि अगर वह चाहे तो एक नेता कि गुम भेंस को भी ढूंढ लाए। पुलिस, प्रशासन और सरकार को इस मामले में सक्रियता दिखानी चाहिए क्योंकि आज तो यह बंजारों के बच्चे उठ रहे हैं, कल अगर ऐसे गैंग के होंसले बुलंद हुए तो कोलोनियों में रहने वाले बच्चे भी सुरक्षित नहीं बचेंगे। आज शिवानी के मां-बाप बस यही गुजारिश कर रहे हैं कि मेरी बेटी को बचा लो … कहां, किस हाल में होगी “ शिवानी “ ।