आगरालीक्स…निर्जला एकादशी तिथि पर इस बार बन रहे काफी शुभ योग। भगवान विष्णु की पूजा से होती है शुभ फलों की प्राप्ति। जानें विस्तार से..
एकादशी व्रत का होता है खास महत्व

श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान एवं गुरु रत्न भंडार वाले ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा के मुताबिक ज्येष्ठ मास की एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। साल में कुल 24 एकादशी तिथि पड़ती है और सभी एकादशी तिथियों का अपना अपना महत्व है। साल में 26 एकादशी पड़ती है।
निर्जला एकादशी में पानी पीने तक की मनाही
ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस एकादशी तिथि को सबसे कठोर एकादशी में से एक माना जाता है। निर्जला एकादशी व्रत के दौरान पानी तक पीने की मनाही होती है।
भगवान विष्णु की पूजा से दीर्घायु व मोक्ष प्राप्ति
इस साल निर्जला एकादशी पर काफी शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। निर्जला एकादशी का व्रत रखने से दीर्घायु और मोक्ष प्राप्ति का वरदान मिलता है। निर्जला एकादशी तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व
ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 17 जून की सुबह 02 बजकर 54 मिनट से आरंभ हो रही है, जो 18 जून को सुबह 04 बजकर 30 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर निर्जला एकादशी व्रत 17 जून को रखा जाएगा। निर्जला एकादशी व्रत का पारण स्मार्त लोग 18 जून को करेंगे।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, स्मार्त लोग निर्जला एकादशी व्रत 17 जून को रखेंगे. वहीं वैष्णव लोग 18 जून को निर्जला एकादशी व्रत रखेंगे.
एकादशी पूजा सामग्री लिस्ट
भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा, चौकी, पीला कपड़ा, दीपक, आम के पत्ते, कुमकुम, फल, फूल, मिठाई, अक्षत, पंचमेवा, धूप समेत अन्य पूजा सामग्री शामिल करें.
निर्जला एकादशी पूजा विधि
भगवान विष्णु को पीले फूल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें. इसके साथ ही भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें. व्रत का संकल्प लेने के बाद अगले दिन सूर्योदय होने तक जल की एक बूंद भी ग्रहण ना करें, इसके बाद विष्णु जी की पूजा करें. इस दौरान उन्हें फूल, माला, पीला चंदन, अक्षत, भोग लगाने के साथ-साथ विष्णु मंत्र, विष्णु चालीसा, एकादशी व्रत कथा का पाठ कर लें, इसके साथ ही मां लक्ष्मी को श्रृंगार की चीजें चढ़ाएं. फिर दीपक जलाकर आरती करें. इस दिन अपनी श्रद्धा अनुसार गरीब लोगों में भोजन, कपड़े और धन का दान करें। इस दिन आप व्रत में ध्यान रखें कि जल या अन्न कुछ ग्रहण नहीं करना है।