आगरालीक्स…आगरा के एसएन में मरीज के ब्रेन की धमनी से बाईपास कर हाथ में खून की सप्लाई की गई. कार्डियोथोरेसिक वैस्कुलर सर्जन डॉ. सुशील सिंघल द्वारा की गई यह सर्जरी के चुनिंदा सेंटर में ही की जाती है…
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में डॉ. सुशील सिंघल द्वारा दुर्लभ वास्कुलर सर्जरी की गई है. इस सर्जरी में मरीज के ब्रेन की धमनी से बाईपास कर हाथ में खून की सप्लाई की गई. मरीज का एक्सीडेंट हुआ था जिसके बाद उनकी गर्दन, हाथ की हड्डियां और हाथ को रक्त पहुंचाने वाली मुख्य धमनी तथा नसों का गुच्छा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था. खून न पहुंचने से मरीज का हाथ काला पड़ गया था और गैंग्रीन फैलने की आशंका थी, लेकिन सर्जरी के बाद अब मरीज स्वस्थ है.
गुरु का ताल पर हुआ था एक्सीडेंट
42 वर्षीय शाहिद सलमानी, निवासी सिकंदरा, आगरा (पेशा: नाई), लगभग एक वर्ष पूर्व गुरु का ताल के पास हुई एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे. इस दुर्घटना में उनकी गर्दन, हाथ की हड्डियाँ, हाथ को रक्त पहुँचाने वाली मुख्य धमनी तथा नसों का गुच्छा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था. पिछले एक वर्ष से वे असहनीय, लगातार और दवाओं से न संभलने वाले दर्द से पीड़ित थे. दिल्ली और जयपुर सहित कई बड़े अस्पतालों में परामर्श के बाद जाँच में यह स्पष्ट हुआ कि दुर्घटना के कारण छाती से हाथ को जाने वाली मुख्य रक्त नली Right Subclavian Artery पूरी तरह बंद (Chronic Thrombotic Occlusion) हो चुकी है तथा साथ ही नसों के गुच्छे पर गंभीर दबाव बना हुआ है.
रक्त की आपूर्ति बंद होने के कारण उनका हाथ कमज़ोर, पतला और काला पड़ने (Gangrene) की कगार पर पहुँच चुका था. सर्जरी अत्यंत उच्च जोखिम वाली होने के कारण मरीज लंबे समय तक ऑपरेशन के लिए तैयार नहीं हो पा रहे थे. जब दर्द पूरी तरह असहनीय हो गया और हाथ को बचाने की आख़िरी उम्मीद बची, तब उन्होंने एस.एन. मेडिकल कॉलेज, आगरा के कार्डियो-थोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जन डॉ. सुशील सिंघल से ओपीडी में संपर्क किया. सीटी एंजियोग्राफी से पुष्टि हुई कि Right Subclavian Artery दुर्घटना के बाद से ही पूरी तरह बंद है और नसों के गुच्छे ( Brachial plexus )पर गंभीर दबाव बना हुआ है.
डॉ. सुशील सिंघल और टीम ने की जटिल सर्जरी
मरीज की नाज़ुक स्थिति को देखते हुए एक अत्यंत दुर्लभ, जटिल एवं उच्च जोखिम वाली वास्कुलर सर्जरी Carotid Axillary Bypass with Decompression of Brachial Plexus — करने का निर्णय लिया गया. इस सर्जरी में दिमाग को रक्त पहुँचाने वाली गर्दन की धमनी (Carotid Artery) से एक आर्टिफिशियल नश जोड़कर हाथ की धमनी (Axillary Artery) तक बायपास बनाया गया, जिससे हाथ में पुनः रक्त प्रवाह संभव हो सका. यह सर्जरी अत्यंत चुनौतीपूर्ण होती है, क्योंकि इसमें ब्रेन को जाने वाली धमनी को अस्थायी रूप से नियंत्रित करना पड़ता है, जिससे स्ट्रोक का गंभीर खतरा बना रहता है. यह अत्यंत जटिल सर्जरी भारत में भी केवल गिने-चुने सुपर-स्पेशियलिटी केंद्रों पर ही की जाती है. इसके बावजूद एस.एन.एम.सी. की सीटीवीएस ( डॉ. सुशील सिंघल & टीम ) एवं एनेस्थीसिया ( डॉ राजीव, डॉ अतिहर्ष टीम ) ने उत्कृष्ट समन्वय, कौशल और अनुभव के साथ इस चुनौती को सफलतापूर्वक पार किया. आयुष्मान योजना के अन्तर्गत की गई यह सर्जरी पूर्णतः सफल रही. हाथ में रक्त प्रवाह बहाल हुआ, नसों पर दबाव कम हुआ और मरीज को वर्षों से चले आ रहे असहनीय दर्द से राहत मिली। आज मरीज मुस्कुराते चेहरे के साथ अस्पताल से छुट्टी लेकर घर लौटे.
सीटीवीएस सर्जरी टीम
डॉ. सुशील सिंघल, डॉ. शिव, डॉ. सनी, डॉ. शुभांशु
एनेस्थीसिया टीम
डॉ. राजीव पुरी, डॉ. अतिहर्ष मोहन, डॉ. सुप्रिया, डॉ. प्रभा, डॉ. कौस्तुभ
एस.एन. मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा कि अब एस.एन.एम.सी. में ऐसी दुर्लभ सुपर-स्पेशियलिटी सर्जरी भी सफलतापूर्वक की जा रही हैं, जिनके लिए पहले मरीजों को दिल्ली जैसे महानगरों में जाकर लाखों रुपये खर्च करने पड़ते थे. इस प्रकार की जटिल वास्कुलर सर्जरी का आगरा में सफल होना पूरे शहर के लिए गर्व का विषय है.