आगरालीक्स…आगरा में ‘मुर्दा’ चलाता दिखा स्कूटी….है न अजब मामला. जानें कैसे आरोपी ने खुद को कोर्ट से करा रखा था मृत घोषित….ऐसे आया सामने
आगरा में एक अजब मामला सामने आया है. कोर्ट में 13 साल पहले फर्जी तरीके से खुद को मृत घोषित करा चुका शख्स आगरा के गांधीनगर में स्कूटी चलाता हुआ दिखाई दिया. कोर्ट ने मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर मामला निरस्त कर दिया था लेकिन 13 साल बाद वादी पक्ष ने स्कूटी चलाते हुए इस शख्स का फोटो खींच लिया. वादी पक्ष ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर साक्ष्य पेश किया जिसके बाद कोर्ट ने थाना न्यू आगरा से आख्या मांगी. कोर्ट के आदेश पर थाना न्यू आगरा पुलिस ने जांच की और जांच में आरोपी जिंदा पाया गया.जानिए क्या है मामला
अप्रैल 1999 में घटिया आजम खां में रहने वाले मदनगोपाल ने कोर्ट में केस दायर किया था. इसमें धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए चुन्नीलाल गोयल, विद्या देवी, रोशनलाल वर्मा और ताराचंद शर्मा को आरोपी बनाया गया था. सितंबर 1999 में कोर्ट ने इस पर संज्ञान लिया. तीन आरोपी चुन्नी लाल गोयल, विद्यादेवी और रोशनलाल वर्मा की मौत हो गई थी और मामला सिर्फ ताराचंद शर्मा के खिलाफ रह गया था. गिरफ्तारी से बचने के लिए ताराचंद की ओर से आरोपी पक्ष ने 2013 में कोर्ट में नगर निगम से बना एक फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र प्रश किया जिसमें उसे 1998 में मृत दर्शया गया. थाना हरीपर्वत पुलिस ने भी 13 अगस्त 2013 को इस पर आख्या दी. कोर्ट ने मृत्यु प्रमाण पत्र व अन्य दस्तावेज व पुलिस आख्या को सही मानते हुए 20 सितंबर 2013 को आरोपी के खिलाफ कार्रवाई बंद कर दी.
स्कूटी चलाते दिखे ताराचंद
वादी राजकुमार शर्मा ने ताराचंद शर्मा को गांधी नगर में नवंबर 2025 में स्कूटी चलाते हुए देखा. उन्होंने मोबाइल से उनका फोटो भी खींच लिया जिसमें स्कूटी का नंबर नोट कर लिया. इसके बाद आरटीओ कार्यालय जाकर दस्तावेज निकवाए. पता चला कि जिस आरोपी को कोर्ट ने 1998 में मृत मान लिया था, उसी आरोपी ने जुलाई 2016 में अपने नाम से नई स्कूटी पंजीकृत करवाई थी और वह बाकायदा बैंक खातों में मोबाइल बैंकिंग का भी इस्तेमाल कर रहा था. इस पर वादी की ओर से विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट—6 की कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया गया और साक्ष्य पेश किए गए.