आगरालीक्स…Agra News: आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे पर सबसे ज्यादा हादसे सुबह तीन से छह बजे के बीच, 1394 हादसे हुए, जानें कारण और कैसे रुकेंगे हादसे। ( Agra News: 58% accident on Agra-Lucknow Expressway due to sleep on driver#Agra )
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीड़ा) द्वारा वर्ष 2024 में 302 किलोमीटर लम्बे आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हुये हादसों का विवरण चैंकाने वाला है। वर्ष 2023 में जहां इस एक्सप्रेसवे पर 97 मृत्यु सड़क हादसों में हुयीं थी वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 190 पहुंच गया, 96 प्रतिशत मौतों की संख्या में वृद्धि हो गयी। एक्सप्रेस वे पैदल यात्रियों की अनुमति नहीं है लेकिन वर्ष 2024 में 12 पैदल यात्रियों की मृत्यु हो गयी। नींद और झपकी से होने वाले हादसों की संख्या 1394 दुर्घटनाओं में से 811 दुर्घटनाएं (अर्थात 58.18 प्रतिशत) थीं। लखनऊ एक्सप्रेसवे को लेकर अनेक अन्य कमियां भी उजागर हुयीं जब सुप्रीम कोर्ट रोड सुरक्षा कमेटी के द्वारा इस एक्सप्रेसवे को लेकर कुछ समय पूर्व सुनवाई की गयी। युवा उद्यमी हेमन्त जैन के प्रार्थना पत्र पर जिसको कि सुप्रीम कोर्ट ने इस कमेटी को सन्दर्भित किया था। सुनवाई के दौरान याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने इस मामले को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।
नींद में गाड़ी चलाने से हादसे
बैठक में यह सामने आया कि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर अधिकांश दुर्घटनाएं सुबह 3 बजे से 6 बजे के बीच होती हैं, जहाँ नींद, थकान में वाहन चलाना एक प्रमुख कारण प्रतीत होता है। वर्ष 2024 में कुल 1394 दुर्घटनाओं में से 811 दुर्घटनाएं (अर्थात 58.18 प्रतिशत) नींद, उंघने के कारण हुईं। सुझाए गए उपाय यूपीड़ा को पिछले 5 वर्षों में इस एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाओं के समय संबंधी आंकड़े प्रस्तुत करने चाहिए। यूपीड़ा को चाहिए कि इन घंटों में मोटर वाहनों की आवाजाही पर, यदि अत्यावश्यक न हो, तो प्रतिबंध लगाने पर विचार करे। यूपीड़ा ने चर्चा के दौरान सुझाव दिया कि यदि ड्राइवर को नींद आने लगे तो अलर्ट करने वाले उपकरण बसों में लगाए जाएंगे। यूपीड़ा को इस प्रस्ताव की योजना और स्थापना की समयसीमा तथा समर्थन में अध्ययन प्रस्तुत करना चाहिए। इस कारण को दूर करने के अन्य उपायों पर भी विचार कर उन्हें लागू करना चाहिए। यूपीड़ा को नींद, थकावट से जुड़ी वाहन चलाने की जोखिमों पर पब्लिक एडवाईजरी जारी करनी चाहिए।