आगरालीक्स…आगरा में हर साल कॉन्वेंट और मिशनरी स्कूल 10 से 15 प्रतिशत फीस बढ़ा रहे हैं. आने वाले पांच साल में एक बच्चे की मंथली फीस 8 से 10 हजार रुपये होगी…इतने के बावजूद ट्यूशन भी जरूरी…
हर पेरेंट्स का सपना होता है कि उनका बच्चा अच्छी एजुकेशन पाए. इसके लिए पेरेंट्स दिन रात जोड़ तोड़ में लगे रहते हैं लेकिन स्कूलों द्वारा हर साल की जा रही फीस वृद्धि उनकी कमर को तोड़ने का काम कर रही है. इसके अलावा महंगी किताबें और कापियां, ड्रेस भी खरीदने को मजबूर हैं. स्कूल प्रबंधन की ओर से न सिर्फ मंथली फीस ली जाती है बल्कि एग्जाम फीस, डेवलपमेंट फीस आदि भी अलग से ली जा रही है. पेरेंट्स हर साल इसका विरोध जताते हैं, समाजिक संस्थाएं भी आती हैं लेकिन ढाक के तीन पात सब कुछ रह जाता है.महंगी फीस के बाजवूद ट्यूशन जरूरी
इतनी महंगी फीस देने के बावजूद बच्चों के लिए ट्यूशन जरूरी हो रहा है. देखा जाए तो अधिकतर बच्चे इस समय ट्यूशन क्लासेस भी ले रहे हैं जिसकी भी 1000 से 1500 रुपये तक फीस है.
स्कूलों की ओर से हर साल फीस में 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की जा रही है. कॉन्वेंट व मिशनरी स्कूलों में तीन—तीन महीने की फीस एक साथ ली जा रही है.
2030 में एक बच्चे की फीस होगी 10000 रुपये
हर साल फीस बढ़ने का आलम ये है कि 2030 यानी पांच साल बाद प्राइमरी में पढ़ने वाले बच्चे की कान्वेंट व मिशनरी स्कूल की फीस 10 हजार रुपये प्रति माह तक जा सकती है.