आगरालीक्स…Agra News: आज अपरा एकादशी है, अपार धन की प्राप्ति के लिए रखा जाता है व्रत, अपरा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है। यह एकादशी ज्येष्ठ मास के कृष्णपक्ष की एकादशी को पड़ती है। अपरा एकादशी को अचला एकादशी, भद्रकाली एकादशी, जलक्रीड़ा एकादशी के रूप में भी जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस एकादशी के व्रत को विधि पूर्वक करने से अपार धन की प्राप्ति होती है। ( Agra News: Apra Ekadashi Vrat for Wealth#Agra)
साथ ही यह एकादशी यश प्रदान करने वाली एकादशी भी मानी जाती है। शुक्रवार 23 मई को स्मार्त शैव संप्रदाय के लोगों के लिए शनिवार 24 मई को वैष्णव जन निम्बार्क लोगों के लिए मान्य होगी।अपार धन की होती है प्राप्ति
युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से इस व्रत के माहात्म्य के बारे में विस्तार से बताने को कहा. युधिष्ठिर ने कहा कि हे प्रभु ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी का क्या नाम है तथा उसका माहात्म्य क्या है, कृपा कर कहिए?
युधिष्ठिर के आग्रह पर भगवान श्रीकृष्ण बताने लगे. हे राजन! यह एकादशी अचला और अपरा एकादशी के नाम से जानी जाती है. पुराणों के अनुसार ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी अपरा एकादशी है, क्योंकि यह अपार धन देने वाली है. जो मनुष्य इस व्रत को करते हैं, वे संसार में प्रसिद्ध हो जाते हैं.
अपरा एकादशी के विषय में ऐसी शास्त्रीय मान्यता है कि जो मनुष्य अपने भूतकाल और वर्तमान के पापों से डरता है उसे इस एकादशी का व्रत करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिन माता भद्रकाली प्रकट हुईं थीं।
अपरा एकादशी के व्रत से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इतना ही नहीं मान्यता यह भी है कि इस व्रत को धारण करने से मनुष्य ब्रह्म हत्या के पाप से भी मुक्त हो जाता है। अपरा एकादशी के दिन भगवान त्रिविक्रम की पूजा की जाती है. अपरा एकादशी के व्रत के प्रभाव से ब्रह्म हत्या, भूत योनि, दूसरे की निंदा आदि के सब पाप दूर हो जाते हैं. इस व्रत को करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं. जो क्षत्रिय युद्ध से भाग जाए वे नरकगामी होते हैं, परंतु अपरा एकादशी का व्रत करने से वे भी स्वर्ग को प्राप्त होते हैं. जो शिष्य गुरु से शिक्षा ग्रहण करते हैं फिर उनकी निंदा करते हैं, वे अवश्य नरक में पड़ते हैं. मगर अपरा एकादशी का व्रत करने से वे भी इस पाप से मुक्त हो जाते हैं. जो फल तीनों पुष्कर में कार्तिक पूर्णिमा को स्नान करने से या गंगा तट पर पितरों को पिंडदान करने से प्राप्त होता है, वही अपरा एकादशी का व्रत करने से प्राप्त होता है. मकर के सूर्य में प्रयागराज के स्नान से, शिवरात्रि का व्रत करने से, सिंह राशि के बृहस्पति में गोमती नदी के स्नान से, कुंभ में केदारनाथ के दर्शन या बद्रीनाथ के दर्शन, सूर्यग्रहण में कुरुक्षेत्र के स्नान से, स्वर्णदान करने से अथवा अर्द्ध प्रसूता गौदान से जो फल मिलता है, वही फल अपरा एकादशी के व्रत से मिलता है.
विस्तृत जानकारी दे रहे है श्री गुरू ज्योतिष शोध संस्थान गुरू रत्न भण्डार पुरानी कोतवाली सराफा बाजार अलीगढ़ यूपी. व्हाट्सएप नंबर.9756402981,7500048250