आगरालीक्स… आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज को किडनी ट्रांसप्लांट की मिली अनुमति, गुर्दा रोगी आगरा में ही किडनी ट्रांसप्लांट करा सकेंगे, जानें पूरी प्रक्रिया। ( Agra News: DGME Office approves Kidney Transplant for SN Medical College Agra, Transplant start in 2026#Agra )
आगरा के एसएन मेडिकल कालेज में 200 करोड़ रुपये से सुपरस्पेशियलिटी विंग बनी है। इस विंग में गुर्दा रोगियों की डायलिसिस और इलाज किया जा रहा है। एक दिन में 40 से अधिक डायलिसिस हो रही हैं। गुर्दा रोगियों की संख्या लगातार बढ़ने पर करीब दो वर्ष पहले एसएन प्रशासन ने गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए आवेदन किया था। इसके लिए कई टीमों ने एसएन में आकर सर्वे किया। महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा ने एसएन में गुर्दा प्रत्यारोपण किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति दे दी है।
2026 में शुरू होगी किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता के अनुसार, आगरा में नए साल 2026 में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा मरीजों को मिलने लगेगी। किडनी ट्रांसप्लांट करने के लिए आगरा के यूरोलॉजिस्ट और नेफ्रोलॉजिस्ट की केजीएमयू, लखनऊ में ट्रेनिंग दी जा रही है। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद एसएन मेडिकल कॉलेज की सुपरस्पिशियलिटी विंग में मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा मिलने लगेगी।
परिजनों की किडनी ही ले सकेंगे मरीज, आयुष्मान और असाध्य रोग निधि के मरीजों के लिए फ्री
एसएन मेडिकल कॉलेज में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू करने के लिए कमेटी भी गठित की गई हैं। एसएन में गुर्दा रोगी के परिजन की किडनी ही प्रत्यारोपण के लिए ली जाएंगी। किसी बाहरी व्यक्ति की किडनी का ट्रांसप्लांट नहीं किया जाएगा। आयुष्मान कार्ड धारक और असाध्य रोग निधि के मरीजों का किडनी ट्रांसप्लांट फ्री होगा।
एसएन में ही होगी पूरी प्रक्रिया
किडनी ट्रांसप्लांट के लिए एसएन के नेफ्रोलॉजी विभाग में आने वाले मरीज जिनका गुर्दा पूरी तरह से खराब हो चुका है और नियमित डायलिसिस करा रहे हैं उनकी सूची तैयार की जा रही है। इन मरीजों के परिजन एक किडनी देने के लिए तैयार हो जाएंगे तो किडनी ट्रांसप्लांट कर दिया जाएगा। इसके लिए मरीजों को किसी भी अनुमति के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा, सभी प्रक्रिया एसएन में ही पूरी की जाएंगी।
डायलिसिस के लिए चल रही वेटिंग
एसएन मेडिकल कॉलेज में कुछ महीने पहले ही एसएस विंग में डायलिसिस सेंटर शुरू किया गया है। इसमें 14 मशीनें हैं और हर रोज 40 से अधिक मरीजों की डायलिसिस की जा रही है। गुर्दा रोगियों की संख्या अधिक होने के चलते डायलिसिस के लिए वेटिंग चल रही है।