आगरालीक्स…मोबाइल गेम की लत में तीन बहनों ने 9वीं मंजिल से कूदकर जान दे दी. आखिर ये मोबाइल गेम दिमाग में ऐसा क्या बदलाव करते हैं जिससे गेम के चंगुल में बच्चे फंस जाते हैं..कैसे पाएं छुटकारा
गाजियाबाद के टीलामोड थाना क्षेत्र के भारत सिटी सोसायटी के टावर बी-1 फ्लैट नंबर 907 से मंगलवार देर रात 2.30 बजे तीनों बहनों 16 वर्ष, 14 वर्ष, 12 वर्ष ने नौवीं मंजिल से नीचे कूंदकर जान दे दी। तीन बहनों के जान देने की सूचना पर पुलिस पहुंच गई. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि तीनों बहन कोरियन टास्क बेस्ट गेम खेल रहीं थी, उनके मोबाइल में भी गेम एप मिला है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कुछ पर्ची भी मिली हैं, इसमें बच्चियों ने लिखा है कि सॉरी पापा हम गेम नहीं छोड़ सकती हैं. कोरियन गेम हमारी जिंदगी हमारी जान है. परिजनों ने बताया कि तीनों बहनें तीन साल से कोरियन गेम खेल रहीं थीं. पिछले दो साल से स्कूल भी नहीं जा रहीं थीं और दिन भर गेम खेलती रहतीं थीं. लोगों से भी बात नहीं करतीं थी यही कहती थीं कि हमें कोरिया जाना है.
रिवार्ड सिस्टम को अपने काबू में कर लेते हैं मोबाइल गेम
आगरा में मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक प्रो. दिनेश राठौर के अनुसार हर व्यक्ति अपनी प्रशंसा चाहता है या ऐसा काम करना चाहता है जिससे उसे खुशी मिले. इस दौरान उसके दिमाग में डोपामिन हार्मोन का स्राव बढ़ जाता है. मोबाइल गेम इसी पर काम करते हैं. अधिकांश मोबाइल गेम एआई इनबिल्ड हैं. ये बच्चों की रुचि को समझते हैं और उसी के हिसाब से गेम उपलब्ध कराते हैं. गेम के हर स्टेप पर बच्चों को रिवार्ड के रूप में कुछ प्वाइंट दिए जाते हैं, इससे उसे खुशी मिलती है और डोपामिन का स्राव लगातार होता रहता है. लंबे समय तक एक घंटे से ज्यादा लगातार मोबाइल गेम खेलने पर डोपामिन का स्राव इतना ज्यादा हो जाता है कि बच्चे को गेम के अलावा किसी और चीज से वो खुशी नहीं मिलती है जिसे वो चाहता है. साथ ही मोबाइल गेम से कुछ ही मिनट में रिवार्ड मिलने शुरू हो जाते हैं. जबकि अगर कोई बच्चा पढ़ाई करता है और उसे अच्छे नंबर आते हैं, इससे मिलने वाले रिवार्ड में समय लगता है, इसके चलते पढ़ाई से ज्यादा बच्चे गेम की तरफ आकर्षित होने लग जाते हैं. एक बार लत लगने के बाद इसे आसानी से छुड़ाया नहीं जा सकता है. चार से छह महीने लत को छुड़ाने में लग जाते हैं.

कैसे छुड़ाएं मोबाइल की लत
प्रो. दिनेश राठौर के अनुसार बच्चे को मोबाइल की लत न लगे इसके लिए उन्हें कम से कम मोबाइल का इस्तेमाल करने दिया जाए. मोबाइल का इस्तेमाल भी अपनी उपस्थिति में कराएं. ऐसे गेम न खेलने दें जो एआई इनबिल्ड हैं. वहीं जिन बच्चों को लत लग गई है, उन्हें मनोचिकित्सक से परामर्श दिलवाएं, कुछ दवाएं दी जाती हैं जो इस रिवार्ड सिस्टम पर काम करती हैं और लत को धीरे—धीरे कम करती हैं. साथ ही बच्चे की काउंसलिंग की जाती है. इसमें परिवर का अहम रोल है कि वो समस्या को समझें और बच्चों को पूरा समय दें. बच्चे को डांटने से फायदा नहीं होता है, उससे बात करें. इस तरह चार से छह महीने में मोबाइल गेम की लत को छुड़ाया जा सकता है.
मोबाइल गेम की लत के लक्षण
- घंटों मोबाइल गेम खेलना
- गुमसुम रहना, ज्यादा लोगों से बात न करना
- लगातार पढ़ाई में कमजोर होते जाना
- देर तक जागना और देर तक सोना
- न खाने का कोई टाइम न नहाने का कोई टाइम
- मोबाइल इस्तेमाल से रोकने पर उग्र व्यवहार करना